नौगांवा में दो दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक संवाद, जलवायु अनुकूल खेती, प्राकृतिक कृषि और कीट-रोग नियंत्रण पर दिया जोर
नौगांवा के बसने की कहानी सुने https://youtu.be/scwfsRn1bwg?si=yjOZkNnH55CWvDSI
मिशन सच, नौगांवा। बदलते मौसम, बेमौसम बारिश और लंबे समय तक सूखे जैसी परिस्थितियों से फसलों को बचाने के लिए वैज्ञानिक खेती अपनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, नौगांवा (अलवर-1) में आत्मा परियोजना के तहत 26 और 27 अक्टूबर को दो दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक संवाद आयोजित किया गया। इसमें किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन, जलवायु अनुकूल खेती, प्राकृतिक कृषि और कीट-रोग नियंत्रण की तकनीकों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त निदेशक कृषि (तिलहन), भरतपुर देशराज सिंह ने रबी फसलों के उत्पादन में वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने, संतुलित पोषण और समय पर कीट-रोग नियंत्रण पर जोर दिया। कृषि अनुसंधान केंद्र, नौगांवा के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. जी.एल. चौधरी ने मौसम और मिट्टी के अनुकूल फसल व किस्मों के चयन, समय पर बुवाई, वर्षा जल संरक्षण और सिंचाई जल के बेहतर उपयोग की जानकारी दी।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस.सी. यादव ने कहा कि फसलों की नियमित निगरानी कर कीट-रोगों की शुरुआती पहचान करनी चाहिए। बिना जरूरत कीटनाशकों का छिड़काव करने के बजाय अनुशंसित उपाय अपनाने चाहिए। सस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. एच.आर. माली ने मिट्टी की जांच के आधार पर खाद डालने तथा जैविक खाद और जैव उर्वरकों के समन्वित उपयोग की सलाह दी।
प्रसार शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. पूनम प्रजापति ने बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत जैसी प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी। कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सुमन खंडेलवाल ने खेती को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में अपनाने, जबकि उद्यान विभाग के उपनिदेशक के.एल. मीना ने फल-सब्जियों की खेती से आय बढ़ाने की संभावनाएं बताईं। आत्मा के परियोजना निदेशक राकेश कुमार यादव ने प्रशिक्षण और किसान समूहों की भूमिका समझाई। संवाद में नौगांवा और रामगढ़ क्षेत्र के किसानों व कृषि अधिकारियों ने भाग लिया।
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