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    सौरव दास से मुलाकात पर संजय किशन कौल का बयान, मर्यादित भाषा पर दिया जोर

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने नागरिक समाज और सार्वजनिक बहस में इस्तेमाल होने वाली भाषा की गिरती मर्यादा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। सौरव दास से अपने संबंधों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने स्थिति साफ की। पूर्व जज ने स्पष्ट किया कि उनकी इस मुलाकात को मेंटरशिप या मार्गदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने संवाद में संयम और शालीनता बनाए रखने की वकालत की।

    सौरव दास से मुलाकात पर पूर्व जस्टिस कौल की सफाई

    सौरव दास से अपने जुड़ाव के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल ने बताया कि उनकी मुलाकात लगभग एक साल पहले हुई थी, जब सौरव दास एक पत्रकार के रूप में उनसे मिले थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनसे केवल एक-दो बार ही बातचीत हुई थी। दिवाली के आसपास सौरव दास के आग्रह पर हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए पूर्व जज ने बताया कि वह एक सामान्य और औपचारिक परिचय था। उन्होंने कहा कि एक-दो बार की मुलाकात के आधार पर उनके संबंधों को किसी औपचारिक मार्गदर्शक या सलाहकार की भूमिका से जोड़ना पूरी तरह गलत है।

    सार्वजनिक संवाद में भाषा के गिरते स्तर पर चिंता

    इंटरव्यू के दौरान पूर्व न्यायाधीश ने सार्वजनिक बहसों में भाषा की मर्यादा पर विस्तार से बात की। उन्होंने याद दिलाया कि मुलाकातों के दौरान उन्होंने भाषा में संयम बरतने की सलाह दी थी। उनका मानना है कि विरोध या असहमति दर्ज कराने के लिए सही शब्दों का चयन बेहद आवश्यक है, क्योंकि केवल बात कहना ही नहीं, बल्कि उसे कहने का तरीका भी काफी मायने रखता है। उन्होंने कहा कि उनके दौर में सार्वजनिक चर्चाएं बेहद सभ्य भाषा में हुआ करती थीं, जबकि आजकल इस्तेमाल होने वाली शब्दावली कई बार उनकी पीढ़ी के लोगों को चुभ जाती है।

    सलाहकार की भूमिका से खुद को रखा दूर

    पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने साफ किया कि वह किसी को भी औपचारिक सलाह देने की भूमिका में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वह ऐसा करते, तो इसे गलत तरीके से दिशा-निर्देश देने के रूप में लिया जा सकता था, जबकि उनका मकसद सिर्फ एक सामान्य बातचीत तक ही सीमित था। उनकी इस टिप्पणी से यह संदेश साफ होता है कि किसी भी निजी मुलाकात या सामान्य परिचय को औपचारिक समर्थन या मार्गदर्शन के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।

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