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    उद्धव-राज ठाकरे से मुलाकात पर फडणवीस का बयान, बोले- कोई राजनीतिक बात नहीं हुई

    मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में एक दुर्लभ और दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। मुंबई में आयोजित 75 कार्टूनिस्टों के कार्यों पर आधारित एक पुस्तक के विमोचन समारोह में इन तीनों नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है। कार्यक्रम से पहले तीनों नेताओं के बीच किसी गुप्त बैठक की अटकलें भी लगाई जा रही थीं, जिसे लेकर अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।

    सांस्कृतिक कार्यक्रम था, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं: फडणवीस

    पुणे में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि वे इस समारोह में किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि एक साहित्य प्रेमी के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि 'महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा' नामक इस पुस्तक में महाराष्ट्र के पिछले 100 वर्षों के 75 व्यंग्यचित्रकारों के योगदान को संकलित किया गया है। वैचारिक मतभेद या राजनीतिक आलोचनाएं अपनी जगह हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नेता एक साथ मंच साझा न करें।

    बंद कमरे में हुई बैठक की खबरों का किया खंडन

    मंच पर आने से पहले तीनों नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बैठक की चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मीडिया की कयासबाजी मात्र है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले सभी नेता और कुछ व्यंग्यचित्रकार एक ही प्रतीक्षालय में मौजूद थे और तय समय पर मंच पर पहुंचे। इस दौरान किसी भी प्रकार की राजनीतिक चर्चा या अलग से कोई बैठक नहीं हुई थी।

    नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना

    इस मुलाकात के बीच बीजेपी नेता और राज्य सरकार में मंत्री नितेश राणे ने उद्धव ठाकरे पर तीखा तंज कसा है। मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा दोनों ठाकरे भाइयों को उनके मूल कला क्षेत्रों (फोटोग्राफी और कार्टून) से जुड़ी सलाह पर प्रतिक्रिया देते हुए राणे ने कहा कि व्यक्ति को वही काम करना चाहिए जिसमें वह पारंगत हो। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे आज महसूस कर रहे होंगे कि राजनीति में आने से कितनी मुश्किलें बढ़ती हैं। यदि वे फोटोग्राफी तक ही सीमित रहते, तो बालासाहेब ठाकरे की पार्टी पर इस तरह के हालात नहीं आते।

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