1600 महिलाओं के रोजगार पर संकट का दावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य सरकार से प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग की
जयपुर। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में नवजात शिशुओं और प्रसूताओं की देखभाल के लिए वर्ष 2008 से प्रोत्साहन राशि पर कार्यरत यशोदा कार्यकर्ताओं की सेवाएं 1 नवंबर से समाप्त किए जाने का मामला सामने आया है। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दीपावली से ठीक पहले महिलाओं का रोजगार छीनना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर कार्यकर्ताओं को राहत देने की मांग की है।
जूली ने बताया कि 31 अक्टूबर को दिल्ली से मिले निर्देश के बाद 1 नवंबर से इन महिलाओं की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। उनके अनुसार, इस योजना के तहत काम करने वाली अधिकांश महिलाएं विधवा और परित्यक्ता हैं। ऐसे में त्योहार से ठीक पहले रोजगार समाप्त होने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
1600 महिलाओं के भविष्य पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि का बजट रोके जाने के कारण सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद नवजात शिशुओं और प्रसूताओं की देखभाल करने वाली करीब 1600 महिलाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि ये महिलाएं लंबे समय से अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रही थीं।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का भी किया था दावा
जूली ने कहा कि उन्होंने पहले भी मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और अपने स्तर पर आवश्यक प्रयास करने का आग्रह किया था। उनका आरोप है कि सरकार ने गरीब और जरूरतमंद महिलाओं की परेशानी पर ध्यान नहीं दिया।
प्रोत्साहन राशि जारी करने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए यशोदा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि तत्काल जारी की जाए। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित महिलाओं को रोजगार और आर्थिक सुरक्षा के मामले में राहत मिल सकेगी तथा वे दीपावली का त्योहार भी मना सकेंगी।
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