आज की युवा पीढ़ी और फिटनेस प्रेमियों के बीच एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन तेजी से एक ट्रेंड बनता जा रहा है। पढ़ाई के दौरान रातों में नींद भगाने, दफ्तर के काम में चुस्ती बनाए रखने या फिर जिम में कसरत के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने के लिए इनका धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है। इन पेय पदार्थों के आकर्षक विज्ञापन और इनमें मिला मीठा स्वाद आसानी से लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं, लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि पल भर में तरोताजा करने का दावा करने वाले ये एनर्जी ड्रिंक्स आपकी सेहत के लिए कितने घातक साबित हो सकते हैं? चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें मौजूद रासायनिक तत्व शरीर को अंदर से खोखला कर सकते हैं।
क्या होते हैं एनर्जी ड्रिंक्स और उनमें मौजूद तत्व
एनर्जी ड्रिंक्स मूल रूप से ऐसे कैफीनयुक्त और गैर-अल्कोहलिक पेय पदार्थ होते हैं, जिनमें टॉरिन, भारी मात्रा में चीनी और अन्य उत्तेजक रसायन मिलाए जाते हैं। इन्हें पीने के बाद कुछ ही पलों में मानसिक सतर्कता बढ़ने, शारीरिक थकान दूर होने और ऊर्जा में अचानक उछाल आने का अहसास होता है। हालांकि, विभिन्न वैज्ञानिक और चिकित्सा अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि इस तरह के कृत्रिम पेयों का नियमित या अत्यधिक सेवन मानव शरीर के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकटों को न्योता दे सकता है, विशेषकर बढ़ते बच्चों और किशोरों पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है।
कैफीन की अति और हृदय संबंधी खतरे
इन एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन की मात्रा बेहद उच्च स्तर पर होती है, जो सीधे तौर पर हमारे तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क को उत्तेजित करती है। जब कोई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा कैफीन का सेवन करता है, तो उसके दिल की धड़कनें अचानक तेज होने लगती हैं, उसे अत्यधिक घबराहट, बेचैनी और उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर की समस्या घेर सकती है। कई मामलों में तो अत्यधिक कैफीन के प्रभाव से दिल की धड़कनें पूरी तरह अनियमित भी हो जाती हैं, जो भविष्य में किसी बड़े हृदय रोग का कारण बन सकती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और नींद पर बुरा असर
क्षणिक ऊर्जा प्रदान करने वाले ये पेय आपकी रातों की नींद को पूरी तरह से प्रभावित कर सकते हैं। विशेष तौर पर यदि शाम या रात के समय इनका सेवन किया जाए, तो अनिद्रा की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। शरीर को प्राकृतिक रूप से मिलने वाला आराम बाधित होने से अत्यधिक बेचैनी, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है। पर्याप्त नींद न मिलने के कारण अगले दिन शरीर में सुस्ती छाई रहती है, जिससे कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है।
अत्यधिक चीनी का सेवन और मधुमेह का जोखिम
कैफीन के साथ-साथ इन डिब्बाबंद ड्रिंक्स में शुगर (चीनी) की मात्रा भी खतरनाक हद तक ज्यादा होती है। स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, बाजार में मिलने वाले करीब 400 मिलीलीटर के एक एनर्जी ड्रिंक में 54 से 62 ग्राम तक अतिरिक्त चीनी हो सकती है, जबकि एक स्वस्थ वयस्क के लिए पूरे दिन में 30 ग्राम से अधिक चीनी का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। इस हिसाब से केवल एक डिब्बा पीने से ही आप तय सीमा से दोगुनी से अधिक चीनी अपने शरीर में उतार लेते हैं, जिससे वजन तेजी से बढ़ने, दांतों के क्षय और टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बच्चों और किशोरों के लिए विशेष चेतावनी
बाल चिकित्सा संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि बच्चों और किशोरों का शारीरिक तंत्र वयस्कों की तुलना में कैफीन और कृत्रिम तत्वों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। कम उम्र में ही इन हानिकारक पेय पदार्थों के संपर्क में आने से बच्चों को हृदय गति असंतुलन, पाचन तंत्र की गड़बड़ी और मानसिक अशांति जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी के चलते बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा यह कड़ाई से सुझाव दिया जाता है कि बच्चों को ऐसे तमाम एनर्जी ड्रिंक्स से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए ताकि उनका शारीरिक व मानसिक विकास सुरक्षित रह सके।



