रामपाल जाट ने केंद्र से भरपाई और तत्काल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद की मांग उठाई
अलवर/जयपुर। खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद शुरू नहीं होने और किसानों को कम दामों पर उपज बेचने से हुए नुकसान का मुद्दा अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन भेजकर मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन सहित खरीफ की सभी दलहन और तिलहन फसलों की तत्काल खरीद शुरू कराने की मांग की है। साथ ही खरीद में देरी के कारण किसानों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई की मांग भी उठाई है।
एमएसपी से कम दाम पर बेचने को मजबूर किसान
ज्ञापन में रामपाल जाट ने बताया कि राजस्थान सरकार की ओर से केंद्र सरकार की मार्गदर्शिका के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। राज्य की ओर से मूंग जैसी फसलों की खरीद 1 नवंबर से शुरू करने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन खरीद शुरू नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि मूंग की आवक 1 सितंबर से पहले ही शुरू हो जाती है। किसान पिछले कई वर्षों से 1 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद समय पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसानों को घोषित समर्थन मूल्य 8,780 रुपये प्रति क्विंटल से कम कीमत पर उपज बेचनी पड़ रही है।
सितंबर में ही 221 करोड़ से अधिक के नुकसान का दावा
किसान महापंचायत के ज्ञापन के अनुसार, सितंबर महीने में राजस्थान की मंडियों में 7,70,481 क्विंटल मूंग की आवक हुई। संगठन का दावा है कि कई किसानों को प्रति क्विंटल करीब 3,000 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। सितंबर की आवक के आधार पर ही किसानों को 221 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान जताया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मूंग के साथ तिलहन, दलहन और बाजरा जैसी फसलों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। किसान महापंचायत ने सवाल उठाया कि जब किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर उपज बेचने के लिए मजबूर नहीं होने देने की बात कही गई है, तो फिर समय पर सरकारी खरीद क्यों नहीं शुरू की जा रही है।
मूंग की शत-प्रतिशत खरीद की मांग
रामपाल जाट ने ज्ञापन में बताया कि देश के कुल मूंग उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत से अधिक रही है और राज्य लंबे समय से मूंग उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2030-31 तक दलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के तहत मूंग की भी शत-प्रतिशत खरीद नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि अरहर, मसूर, उड़द और चने की तरह मूंग की खरीद में भी समान व्यवस्था लागू होनी चाहिए। इसके साथ ही तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुनिश्चितता के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
नुकसान की भरपाई के लिए भी मांगा आदेश
किसान महापंचायत ने केंद्र सरकार से मांग की है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीफ की सभी दलहन और तिलहन फसलों की खरीद तत्काल शुरू कराई जाए। जिन किसानों को सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ी है, उन्हें मूल्य समर्थन योजना और भावांतर भुगतान अथवा कमी मूल्य भुगतान योजना के तहत हुए नुकसान की भरपाई दी जाए।
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