करनाल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पांच नवंबर को हरियाणा की उस पंजाबी बेल्ट में पहुंचे हैं, जिसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव पड़ोसी राज्य पंजाब तक फैला हुआ है। करनाल और अंबाला में आयोजित उनके दो कार्यक्रमों के मुख्य एजेंडे भले ही अलग-अलग हों, लेकिन इस दौरे से निकल रहे राजनीतिक संदेश का दायरा पंजाब तक स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
चुनावी बिसात और बड़े जनसमर्थन की तैयारी
करनाल में 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा के माध्यम से कांग्रेस को घेरने की रणनीति तैयार की गई है, वहीं अंबाला में पिछले 14 वर्षों के विकास कार्यों और ऐतिहासिक विरासत को प्रस्तुत कर भाजपा अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करेगी। चूंकि पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में शाह के इस दौरे को पड़ोसी राज्य की राजनीतिक बिसात से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा के लिए इस आयोजन का एक मुख्य उद्देश्य हरियाणा के चार प्रमुख लोकसभा क्षेत्रों—करनाल, सोनीपत, अंबाला और कुरुक्षेत्र—की 36 विधानसभा सीटों तक सीधा प्रभाव बनाना है।
संगठनात्मक ताकत का शक्ति प्रदर्शन
दोनों कार्यक्रमों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 2,000 से अधिक बसों का प्रबंध किया गया है। पार्टी केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित न रहकर विधानसभा क्षेत्र, मंडल, शक्ति केंद्र और ग्राम पंचायत स्तर तक के कार्यकर्ताओं और जनता को जोड़ने पर जोर दे रही है। इस व्यापक गोलबंदी के जरिए भाजपा क्षेत्र में अपनी गहरी संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक पकड़ का प्रदर्शन करना चाहती है।
करनाल में विपक्ष पर प्रहार
करनाल में अमित शाह सुबह सेक्टर-12 से कर्ण कैनाल तक आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा की अगुवाई कर रहे हैं और इसके उपरांत एक जनसभा को संबोधित करेंगे। भाजपा का उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दलों को करारा जवाब देना है। करनाल का यह मंच मुख्य रूप से राजनीतिक हमलों और पार्टी की नीतियों को सीधे जनता के सामने रखने का माध्यम बन रहा है।
अंबाला में विकास और ऐतिहासिक गौरव पर जोर
करनाल के बाद अमित शाह अंबाला छावनी पहुंचकर लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 1857 की क्रांति के शहीद स्मारक का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद वे गांधी मैदान में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। पंजाब सीमा के निकट स्थित अंबाला से भाजपा हरियाणा की विकास यात्रा के साथ-साथ देश की ऐतिहासिक विरासत को भी अपनी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रख रही है।



