सैन्य सम्मान के बाद अस्थियां पहुंचीं केसरपुर, अंतिम विदाई देने उमड़ा गांव और गूंजे जय हिंद के नारे
अलवर। अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में बादल फटने से आई भीषण बाढ़ में लापता हुए अलवर जिले के केसरपुर गांव निवासी अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर के पार्थिव शरीर की करीब 80 दिन बाद पहचान हुई। डीएनए जांच से पहचान की पुष्टि के बाद 2 नवंबर को असम के डिब्रूगढ़ में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके अस्थि-अवशेष परिजनों को सौंपे गए।
4 नवंबर की रात तक अस्थि-अवशेष अलवर की ईटाराणा सैन्य छावनी पहुंच गए। आज छावनी में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद उन्हें तिरंगे के साए में रैली के रूप में पैतृक गांव केसरपुर ले जाया गया। गांव में अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन उमड़े। इस दौरान भारत माता के जयकारे गूंजते रहे।
14 अगस्त को बादल फटने से हुआ था हादसा
जानकारी के अनुसार, 14 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले के अनिनी स्थित पशुपानी क्षेत्र में बादल फटने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन हुआ था। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में सेना के सात जवान आ गए थे। इनमें से दो जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि अग्निवीर समुद्र सिंह गुर्जर सहित पांच जवान लापता हो गए थे।
इसके बाद भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की टीमों ने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में संयुक्त खोज अभियान चलाया। करीब 80 दिन तक चले अभियान के बाद समुद्र सिंह का पार्थिव शरीर बरामद हुआ। डीएनए जांच के जरिए उनकी पहचान की पुष्टि की गई।
दादा से प्रेरित होकर चुनी सेना की राह
समुद्र सिंह गुर्जर अलवर जिले के केसरपुर गांव के निवासी थे। उनका परिवार पीढ़ियों से देशसेवा से जुड़ा रहा है। उनके दादा पलटूराम भारतीय सेना में हवलदार रह चुके हैं। दादा को सेना में सेवा करते देखकर समुद्र सिंह ने भी देश की रक्षा का सपना देखा और वर्ष 2024 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में चयनित हुए।
जबलपुर में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी पहली तैनाती अरुणाचल प्रदेश के दिबांग जिले में हुई थी।
दो बहनों के इकलौते भाई थे समुद्र
समुद्र सिंह अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनकी दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। उनके पिता बदली गुर्जर खेती-किसानी करते हैं। समुद्र अविवाहित थे और परिवार को उनसे काफी उम्मीदें थीं।
पिता से कहा था—रक्षाबंधन पर घर आऊंगा
समुद्र सिंह की अपने पिता से आखिरी बातचीत भावुक कर देने वाली थी। उन्होंने बताया था कि छुट्टी के लिए आवेदन कर दिया है और रक्षाबंधन पर घर आएंगे। उन्होंने घर लौटकर पिता के पैरों का इलाज और ऑपरेशन करवाने की बात भी कही थी।
परिवार बेटे के घर लौटने का इंतजार कर रहा था, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी खुशियां छीन लीं। अब गांव में तिरंगे के साए में उनकी अंतिम विदाई के दौरान हर आंख नम नजर आई।
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