इंदौर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर-देवास बायपास मार्ग की अत्यंत जर्जर और दयनीय स्थिति पर कड़ा संज्ञान लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक को आगामी 22 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का कड़ा निर्देश जारी किया है। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारी को बायपास की सड़कों के उच्च स्तरीय रखरखाव और उसकी भविष्य की ठोस कार्ययोजना का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया है।
याचिका में बायपास की बदहाली और टोल वसूली का मुद्दा
एमएएटीआर फाउंडेशन के माध्यम से दायर की गई एक जनहित याचिका में बायपास मार्ग की जर्जर हालत और इसके रखरखाव में बरती जा रही गंभीर लापरवाही का मामला प्रमुखता से उठाया गया था। याचिका में न्यायालय को अवगत कराया गया कि इस मुख्य मार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े और गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिसके कारण पूरी सड़क असमतल और बेहद फिसलन भरी हो गई है। इसके अलावा, बारिश के दिनों में जलभराव, चोक पड़ी नालियां, रात के समय खराब दृश्यता, पुल-पुलियाओं में आई दरारें तथा सर्विस रोड व अंडरपास की बदतर हालत के कारण यहां से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को आए दिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई थी कि जब तक इस महत्वपूर्ण मार्ग का सुचारू और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक यहां से की जाने वाली टोल वसूली को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। याचिका के समर्थन में सड़क सुरक्षा से जुड़े सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अवहेलना को दर्शाती ताजा रंगीन तस्वीरें भी साक्ष्य के तौर पर अदालत में पेश की गईं।
प्राधिकरण के रवैये पर उच्च न्यायालय की कड़ी नाराजगी
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ के समक्ष संपन्न हुई। सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से सड़क की वास्तविक स्थिति का जवाब देने के बजाय सीधे तौर पर याचिकाकर्ता की साख और याचिका दायर करने के अधिकार पर ही सवाल खड़े किए गए। प्राधिकरण के इस गैर-जिम्मेदाराना रुख पर उच्च न्यायालय ने गंभीर असंतोष और कड़ी नाराजगी प्रकट की। अदालत ने स्पष्ट रूप से टिप्पणी की कि जनहित से जुड़े सड़क सुधार जैसे गंभीर मुद्दों पर सकारात्मक जवाब देने के बजाय प्रतिवादी पक्ष का पूरा जोर केवल याचिकाकर्ता के अधिकार को चुनौती देने पर ही केंद्रित रहा, जो कि न्यायोचित नहीं है।
कार्रवाई की रिपोर्ट और भविष्य की कार्ययोजना पेश करने का आदेश
उच्च न्यायालय ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे सड़क से जुड़ी समस्त शिकायतों का त्वरित निराकरण करें और अब तक की गई सुधारात्मक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तैयार रखें। अधिकारी को आगामी 22 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर यह स्पष्ट करना होगा कि वे भविष्य में बायपास की सड़कों का नियमित, सुरक्षित और प्रभावी रखरखाव किस प्रकार सुनिश्चित करेंगे। अदालत ने इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 दिसंबर की तिथि निर्धारित की है।


