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    मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की नई पहल, 8 टाइगर रिजर्व में बनेंगे बफर जोन

    भोपाल। प्रदेश में वन्यजीवों के समुचित संरक्षण और बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में पृथक 'बफर वनमंडल' का गठन किया जाएगा। वर्तमान में केवल कान्हा टाइगर रिजर्व में ही बफर वनमंडल की व्यवस्था लागू है। राज्य के शेष आठ टाइगर रिजर्वों में भी इस एकीकृत व्यवस्था को आकार देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

    उल्लेखनीय है कि तत्कालीन वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े द्वारा इसी वर्ष जनवरी माह में मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था, जो लंबित चल रहा था। अब इस प्रक्रिया को पुनः गति दी गई है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक बफर वनमंडल में स्वतंत्र रूप से डीएफओ (उप वन संरक्षक) की तैनाती की जाएगी।

    एकीकृत नियंत्रण से सुगम होगा वन्यजीव प्रबंधन

    इस व्यवस्था का प्राथमिक ध्येय कोर क्षेत्र से सटे ग्रामीण अंचलों, राजस्व भूखंडों तथा जंगलों में वन्यजीव सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय आजीविका विकास एवं पर्यटन गतिविधियों का सुचारू संचालन करना है। कान्हा के अतिरिक्त अन्य आठ टाइगर रिजर्वों के बफर इलाके वर्तमान में विभिन्न प्रादेशिक सामान्य वनमंडलों के अधीन विभक्त हैं।

    बफर वनमंडल का गठन पूरा होने के बाद संपूर्ण परिक्षेत्र सीधे टाइगर रिजर्व के बफर डीएफओ के एकीकृत प्रशासनिक नियंत्रण में आ जाएगा। इससे कोर और बफर क्षेत्रों के मध्य सुरक्षा नेटवर्क और आपसी समन्वय अत्यधिक सुदृढ़ होगा।

    पर्यावास विकास और ग्रासलैंड निर्माण पर रहेगा जोर

    यह नवगठित बफर वनमंडल अति-संवेदनशील कोर एरिया को बाहरी मानवीय हस्तक्षेप तथा रिहायशी दबाव से सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत रक्षात्मक आवरण (प्रोटेक्टिव लेयर) के रूप में कार्य करेगा। इन क्षेत्रों में वन्यजीवों की आहार जरूरतों को पूरा करने हेतु विशेष ग्रासलैंड (घास के मैदान) विकसित किए जाएंगे, साथ ही प्राकृतिक एवं कृत्रिम जलस्रोतों का निर्माण होगा। इस पहल से शाकाहारी वन्यजीवों एवं बाघों का कोर क्षेत्र से बाहर मानव बस्तियों की ओर पलायन रुकेगा।

    कान्हा की तर्ज पर वर्षाकाल में भी सुलभ होगा पर्यटन

    कान्हा टाइगर रिजर्व का बफर वनमंडल अपने विशिष्ट इको-टूरिज्म मॉडल और सफारी प्रबंधन के लिए जाना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान जब मुख्य कोर क्षेत्र पर्यटकों के लिए पूर्णतः बंद रहता है, तब भी बफर जोन में सफारी सुविधाएं अनवरत संचालित होती हैं।

    पूर्व वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े के अनुसार, कोर एरिया में एकल डीएफओ होने के कारण विस्तृत क्षेत्र का प्रभावी प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अतः कान्हा मॉडल के आधार पर पृथक बफर वनमंडल बनाकर स्वतंत्र डीएफओ की नियुक्ति से प्रदेश में वन्यप्राणी संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।

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