अलवर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को अलवर जिले में गुरु वंदन के विविध कार्यक्रमों का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में हुआ। इस विशेष दिन पर लोग अपने आध्यात्मिक गुरुओं के चरणों में नतमस्तक होकर ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने भी अलवर स्थित हीरानाथ जी की बगीची और अट्टा मंदिर जाकर संत महात्माओं से आशीर्वाद प्राप्त किया और उनका ससम्मान वंदन किया।
मंत्री संजय शर्मा का मंदिरों में गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। उन्होंने संतों से आशीर्वाद लेकर प्रदेश और जनता की सुख-शांति की कामना की। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “गुरु का जीवन में स्थान सर्वोपरि होता है। गुरु ही हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर आत्मबोध की ओर ले जाते हैं। गुरु पूर्णिमा न केवल वैदिक संस्कृति की परंपरा का उत्सव है, बल्कि यह जीवन में गुरु के मार्गदर्शन और आदर्शों की पुनः स्मृति दिलाने का अवसर भी है।”
हीरानाथ जी की बगीची में हुए कार्यक्रम में कई संत-महात्माओं और साधुजनों ने अपने प्रवचनों के माध्यम से गुरु की महिमा का गुणगान किया। अट्टा मंदिर में हुए आयोजन में क्षेत्र के नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मंत्री श्री शर्मा ने संतों को माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया और उन्होंने संतों से पर्यावरण संरक्षण, सेवा कार्यों और समाज को संस्कारवान बनाने के दिशा में मार्गदर्शन मांगा।
गुरु पूर्णिमा पर शहर भर में विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन हुआ। जगह-जगह भजन-कीर्तन, सत्संग और हवन जैसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों में लोगों ने सहभागिता की। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ ही गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए शिष्यों ने उन्हें वस्त्र, फल और दक्षिणा भेंट की।
गौरतलब है कि गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन कर मानवता को ज्ञान का अमूल्य भंडार प्रदान किया। इसी कारण यह दिन विद्या, साधना और सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
मंत्री श्री शर्मा ने इस मौके पर सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने जीवन में एक ऐसे मार्गदर्शक को स्थान दें जो उन्हें सत्कर्म, सेवा और सच्चाई के पथ पर अग्रसर करे। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जिसे हमें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।
इस तरह अलवर में गुरु पूर्णिमा का पर्व भक्ति, श्रद्धा और संत समागम के साथ गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।


