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    डॉ. शिवम साधक जी महाराज ने श्री शिव महापुराण कथा में दिया जीवन को बदलने वाला संदेश

    श्री शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन भक्ति में लीन हुआ महावर धर्मशाला परिसर

    अलवर।महावर धर्मशाला, कुश मार्ग पर चल रही श्री शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास डॉ. शिवम साधक जी महाराज ने श्रोताओं को आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति की गहराइयों में पहुंचाने वाला संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने भी कुम्भज ऋषि के पास शंभू रूप में जाकर विनम्रता के साथ कथा सुनी थी। इसलिए हमें भी अहंकार त्याग कर कथा श्रवण करना चाहिए, तभी हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

    डॉ. साधक जी ने कहा कि –

    “श्रवण, कीर्तन और मनन – यही तीन मार्ग हैं, जिनसे जीव शिव पद को प्राप्त कर सकता है। सत्संग के बिना श्रवण संभव नहीं, और श्रवण से ही कीर्तन और अंततः मनन की सिद्धि होती है।”

    प्रयागराज की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं को पावन तीर्थों के महत्व से अवगत कराया। कथा के दौरान जैसे ही शिव महिमा के भावपूर्ण प्रसंग आए, महिलाओं और पुरुषों ने झूमकर नृत्य किया और “हर हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंगल गीतों की मधुर गूंज और आरती के समय श्रद्धालुओं की एकाग्रता ने समूचे सभा स्थल को भक्ति रस में डुबो दिया।
    श्री शिव महापुराण कथा का यह दिव्य आयोजन 27 जुलाई 2025 तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक जारी रहेगा।
    इस भव्य आयोजन की व्यवस्थाओं में मदन लाल गुप्ता (गाटर वाले), मंजू गुप्ता, सुभाष मित्तल, अनिल खंडेलवाल, गिरिराज, गंगा गुप्ता, सुनीता जैन, अल्का मित्तल, डॉ. कुमुद गुप्ता, मंजू पालीवाल, संतोष सुनेजा, सुनीता मित्तल, राजकुमारी, वर्षा सहित कई श्रद्धालु सक्रिय रहे।
    कथा के पश्चात सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें भक्ति के साथ-साथ सेवा भाव भी समाहित था। आयोजन के हर क्षण में श्रद्धा, सेवा और समर्पण की त्रिवेणी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

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