पूजा अर्चना एवं हवन यज्ञ के साथ नवीन कन्या महाविद्यालय भवन का श्री गणेश, मनाया प्रवेशोत्सव
राजगढ़ (अलवर)।
राजगढ़ कस्बे के प्रताप स्टेडियम में नवनिर्मित कन्या महाविद्यालय भवन का उद्घाटन गुरुवार को पूजा-अर्चना और हवन यज्ञ के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों से हुआ। इस पावन अवसर पर महाविद्यालय में प्रवेशोत्सव का आयोजन भी किया गया, जिसमें छात्राओं, स्टाफ और आमजन ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इस शुभारंभ कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ. राव सज्जन सिंह के नेतृत्व में हवन यज्ञ से हुई, जिसमें छात्राओं और स्टाफ सदस्यों ने सामूहिक रूप से आहुतियाँ अर्पित कीं। इस धार्मिक आयोजन के माध्यम से नई शुरुआत के लिए सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद प्राप्त करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से बरगद, पीपल, नीम जैसे छायादार एवं औषधीय पौधे लगाए गए। हरियाली को बढ़ावा देने के लिए छात्राओं ने भी वृक्षारोपण में भाग लिया और परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने का संकल्प लिया।
छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह में रंग भर दिए। उन्होंने देशभक्ति गीत, लोकनृत्य और प्रेरणादायक कविताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। मंच संचालन कर रहीं डॉ. आरती जैन (सहायक आचार्य, हिंदी) ने अपने ओजस्वी और प्रेरणात्मक संवादों से छात्राओं को सृजनशीलता और सामूहिक सहयोग का महत्व बताया।
प्राचार्य डॉ. राव सज्जन सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि – “कन्याओं को शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने हेतु यह भवन समर्पित है। यदि छात्राएं नियमित अध्ययन और अनुशासन को अपना लें, तो कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं होता। शिक्षा ही नारी उत्थान का मूल मंत्र है।”
उन्होंने छात्राओं से नियमित अध्ययन, समर्पण, और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की अपील की और श्रेष्ठ शैक्षणिक प्रदर्शन की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम में विशिष्ट उपस्थिति दर्ज कराने वाले स्टाफ सदस्यों में शामिल थे –
डॉ. राजेंद्र गोठवाल, डॉ. नीरू मीणा, डॉ. कृष्ण ओला, डॉ. नवल किशोर जाट, दिनेश कुमार कुम्हार, डॉ. अशोक कुमार यादव, कपिल शर्मा, मंजू सैनी, मनोहर लाल सहित कई शिक्षकगण और अभिभावकगण।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन डॉ. आरती जैन ने किया, जिन्होंने छात्राओं को पढ़ाई में निरंतरता, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की सीख दी।
कार्यक्रम के अंत में हवन पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण के साथ वातावरण भक्तिमय और सौहार्दपूर्ण हो गया। नवनिर्मित कन्या महाविद्यालय भवन न केवल शिक्षा की संरचना है, बल्कि बेटियों के उज्जवल भविष्य का प्रतीक भी बनकर उभरेगा।


