डॉ. शिवम साधक जी महाराज द्वारा सुनाए शिव-पार्वती विवाह प्रसंग पर श्रद्धालु हुए भावविभोर
मिशनसच न्यूज, अलवर। महावर धर्मशाला में चल रही शिव महापुराण कथा के अंतर्गत कथा व्यास डॉ. शिवम साधक जी महाराज ने शुक्रवार को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मित्र हो या जीवनसाथी, किसी भी संबंध की असली परीक्षा विपत्ति के समय ही होती है। जब जीवन में कठिनाई आती है, तब ही यह स्पष्ट होता है कि कौन हमारे साथ खड़ा है और कौन सिर्फ स्वार्थ के लिए जुड़ा हुआ था।
महाराज जी ने कहा कि हमें कोई भी संबंध सहायता लेने की भावना से नहीं, बल्कि सेवा और सहयोग की दृष्टि से जोड़ना चाहिए। यदि किसी भी रिश्ते की बुनियाद में स्वार्थ होता है, तो वह अधिक समय तक टिक नहीं सकता।
शिव-पार्वती विवाह का मनोहारी प्रसंग
कथा के दौरान माता पार्वती के तप और भगवान शिव से विवाह का अद्भुत प्रसंग प्रस्तुत किया गया। श्रद्धालुओं को बताया गया कि किस प्रकार माता पार्वती ने नारद जी के मार्गदर्शन में कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया।
कथा में जब शिव विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई, तो पूरा पांडाल भक्ति और आनंद से सराबोर हो उठा। भूत-प्रेतों ने भगवान शिव का अलौकिक श्रृंगार किया और एक अनूठी बारात निकाली, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। यह दृश्य भावनात्मक और दर्शनीय दोनों रहा।
आरती और प्रसाद वितरण
विवाह के इस मनोहारी प्रसंग के उपरांत सभी भक्तों ने मिलकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारी। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भाग लिया।
कथा का मुख्य संदेश यही रहा कि त्याग, तप और निःस्वार्थ संबंधों से ही जीवन सार्थक होता है। विपत्तियों में जो साथ निभाए, वही सच्चा मित्र और सच्चा जीवनसाथी होता है।
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