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    किशनगढ़ बास: जर्जर स्कूल भवनों पर प्रशासन सख्त, निरीक्षण में कई भवन असुरक्षित पाए गए

    स्कूल सुरक्षा को लेकर सतर्क हुआ प्रशासन: किशनगढ़ बास के विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण, जर्जर स्कूल भवनों पर कड़ी निगरानी के निर्देश

    किशनगढ़ बास । झालावाड़ की स्कूल दुर्घटना के बाद प्रदेशभर में स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। इसी क्रम में खैरथल जिला कलेक्टर किशोर कुमार और उपखंड अधिकारी मनीष कुमार जाटव द्वारा किशनगढ़ बास क्षेत्र के बास कृपाल नगर और गंज के विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों का सघन निरीक्षण किया गया।

    इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जर्जर, क्षतिग्रस्त या संभावित रूप से असुरक्षित भवनों की पहचान करना, उनकी तकनीकी जांच कराना, और मरम्मत हेतु प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजना है।

    इन भवनों में पाई गई खामियां

    निरीक्षण के दौरान विभिन्न शिक्षण संस्थानों में गंभीर संरचनात्मक खामियां पाई गईं:

    • पीएम श्री विद्यालय, बास कृपाल नगर: यहां दो कमरों की छत की पट्टियां टूटी हुई पाई गईं।

    • संस्कृत विद्यालय, बास कृपाल नगर: एक कमरे में स्पष्ट दरारें देखी गईं।

    • आंगनबाड़ी केंद्र, बास कृपाल नगर: एक साइड की दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त पाई गई।

    • संस्कृत विद्यालय, गंज: विद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या सामने आई, वहीं रसोईघर भी क्षतिग्रस्त पाया गया।

    • गांव चामरोदा का विद्यालय: यहां एक कमरा जर्जर स्थिति में मिला।

    निर्देश: जर्जर कमरों का उपयोग तुरंत बंद हो

    एसडीएम मनीष कुमार जाटव ने निरीक्षण के पश्चात सभी संस्था प्रधानों को निर्देशित किया कि वे किसी भी स्थिति में जर्जर भवनों या कमरों का उपयोग न करें। उन्होंने कहा कि यदि किसी कमरे की स्थिति असुरक्षित प्रतीत हो तो तत्काल उसका उपयोग बंद कर उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाए।

    भवनों की नियमित निगरानी जरूरी

    निरीक्षण टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्रों की इमारतों की नियमित निगरानी होनी चाहिए। विशेषकर वर्षा ऋतु के दौरान:

    • छतों और आसपास जल भराव न हो,

    • दरारें या झुकाव दिखे तो तुरंत तकनीकी जांच करवाई जाए,

    • समय-समय पर छोटे-मोटे मरम्मत कार्य कर भवन को सुरक्षित बनाए रखें।

    तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर भेजने के निर्देश

    संस्था प्रमुखों को यह भी कहा गया कि संभावित क्षतिग्रस्त भवनों की तकनीकी रिपोर्ट बनवाकर, सम्बंधित विभाग को मरम्मत हेतु प्रस्ताव भेजें। इसके तहत राजकीय निर्माण विभाग या पंचायत समिति से तकनीकी सहायक भवन का निरीक्षण कर रिपोर्ट बना सकते हैं।

    भविष्य की दुर्घटनाओं से सुरक्षा के लिए अहम कदम

    राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम झालावाड़ जैसी किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में ठोस पहल है। इसके जरिए बच्चों, शिक्षकों और स्टाफ की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

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