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    Homeराज्यछत्तीसगढ़धान-मक्का की पारंपरिक खेती से नहीं बदल रही थी जिंदगी

    धान-मक्का की पारंपरिक खेती से नहीं बदल रही थी जिंदगी

    रायपुर :  कोंडागांव के छोटे से गांव जरेबेंदरी के किसान जयराम देवांगन के लिए कुछ साल पहले तक खेती सिर्फ गुजारे का साधन थी। धान और मक्का की पारंपरिक खेती से सालभर की मेहनत के बाद करीब एक लाख रुपये की आमदनी होती थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो जाता था। लेकिन आज वही जयराम मछली पालन के जरिए सालाना करीब 7 लाख रुपये कमा रहे हैं और आसपास के किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं।

    जयराम की जिंदगी में यह बदलाव प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से आया। उन्होंने अपनी 1.40 हेक्टेयर भूमि पर तालाब निर्माण कराने का फैसला लिया। करीब 15.40 लाख रुपये की लागत वाले इस कार्य में शासन से उन्हें 6.16 लाख रुपये का अनुदान मिला। इसके बाद उन्होंने आधुनिक तकनीकों के साथ मछली पालन और मत्स्य बीज उत्पादन शुरू किया।

    शुरुआत में चुनौतियां जरूर थीं, लेकिन लगातार मेहनत और मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन ने उन्हें सफलता दिलाई। अब उनकी आय पहले की तुलना में लगभग छह गुना बढ़ चुकी है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने से परिवार का जीवनस्तर भी बेहतर हुआ है। जयराम देवांगन कहते हैं कि यदि शासन की योजना और विभागीय सहयोग नहीं मिलता, तो शायद वे इतना बड़ा कदम नहीं उठा पाते। अब वे भविष्य में इस कार्य का और विस्तार करने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि योजनाओं का सही उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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