भारत के पहले सिंधी फूड ब्रांड ‘सिंधी स्वाद’ की वेबसाइट का शुभारंभ, मयंक बजाज ने कहा – “सिंधी व्यंजनों से साकार हुई लोक संस्कृति”
मिशनसच न्यूज, खैरथल (मनीष मिश्रा)।
सिंधी व्यंजनों की खुशबू अब देशभर के घरों तक पहुँचेगी, और यह संभव होगा भारत के पहले ऑनलाइन सिंधी फूड ब्रांड ‘सिंधी स्वाद’ के माध्यम से। आनंद नगर कॉलोनी स्थित झूलेलाल मंदिर में चालिहा पर्व के पावन अवसर पर ‘सिंधी स्वाद’ वेबसाइट का विधिवत शुभारंभ किया गया।
इस ऐतिहासिक अवसर पर ब्रांड के संस्थापक मयंक बजाज ने कहा – “सिंधी व्यंजन सिर्फ स्वाद नहीं, हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं। दादी-नानी के हाथों का स्वाद, अब हर घर तक पहुँचेगा – बिना किसी मिलावट और प्रिज़र्वेटिव के।”
झूलेलाल मंदिर में हुआ विधिवत शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत बाबा शीतलदास के सानिध्य में धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। मंच पर उपस्थित रहे:
पूज्य सिंधी पंचायत खैरथल अध्यक्ष मुखी मनोहरलाल रोघा
पूज्य सिंधी पंचायत अलवर जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश रोघा
व्यवस्थापक अर्जुनदास बाबानी
समाजसेवी महेश आडतानी
सभी ने मिलकर www.sindhiswadh.com वेबसाइट का विधिवत उद्घाटन किया।
मयंक बजाज ने बताया – क्या है ‘सिंधी स्वाद’ की खासियत
मयंक बजाज ने बताया कि ‘सिंधी स्वाद’ केवल एक फूड ब्रांड नहीं बल्कि एक मिशन है, जिसका उद्देश्य सिंधी खानपान को ऑनलाइन पहचान दिलाना है। “आज तक सिंधी व्यंजन घरों तक सीमित रहे, लेकिन अब समय है कि दुनिया इनका स्वाद चखे।”
ब्रांड की विशेषताएं:
सभी उत्पाद हाथ से बनाए गए, बिना मशीन प्रक्रिया के
कोई प्रिज़र्वेटिव नहीं, कोई मिलावट नहीं
पारंपरिक रेसिपी, जैसे दादी-नानी के हाथों का खाना
ऑनलाइन ऑर्डर की सुविधा: www.sindhiswadh.com
उपलब्ध प्रोडक्ट्स: सिंधी स्नैक्स, मिठाइयाँ, पापड़, चटपटी नमकीन आदि
चालिहा पर्व पर शुरूआत – एक आध्यात्मिक संकेत
इस ब्रांड का शुभारंभ चालिहा पर्व जैसे पवित्र दिन पर हुआ, जो झूलेलाल जी की भक्ति, उपवास और आत्मसंयम का प्रतीक है। ऐसे शुभ दिन पर लोक संस्कृति के खानपान को नए आयाम देना, एक संयोग नहीं, बल्कि संकल्प है।
लोक संस्कृति का डिजिटलीकरण
‘सिंधी स्वाद’ के माध्यम से सिंधी व्यंजनों की विविधता को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। यह प्रयास न केवल खानपान की परंपरा को जीवित रखेगा, बल्कि नवीन पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का भी माध्यम बनेगा।


