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    किशनगढ़ बास में अवैध प्लाटिंग पर 177 की कार्रवाई सवालों के घेरे में

    किशनगढ़ बास में दोहरी नीति से लोग परेशान, प्रशासन पर उठे सवाल
    किशनगढ़ बास (अलवर)। नवगठित किशनगढ़ बास जिले में तहसील प्रशासन द्वारा कृषि भूमि पर की जा रही अवैध प्लाटिंग के खिलाफ की गई राजस्व नियम 177 के तहत कार्रवाई इन दिनों गहरी चर्चाओं और विवादों का विषय बनी हुई है। प्रशासन की इस कार्रवाई की दोहरी नीति पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं—कहीं अवैध प्लाटिंग पर सख्ती, तो कहीं पूरी चुप्पी और अनदेखी।
    एक ओर जहां तहसील प्रशासन ने  अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाकर करोड़ों रुपए की गतिविधियों को रोक दिया है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में खुलेआम प्लाटिंग जारी रहने पर भी प्रशासनिक चुप्पी को लोग पक्षपात और मिलीभगत से जोड़कर देख रहे हैं।
    करोड़ों अटके, गहराया असमंजस
    जानकारी के अनुसार किशनगढ़ बास क्षेत्र में कई कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग करते हुए  प्लॉट बेचे जा रहे थे। तहसील प्रशासन द्वारा इन पर 177 की कार्रवाई करते हुए उन्हें रोक दिया गया, जिससे  करोड़ों रुपए फंस गए हैं। भूमि खरीदने वालों की भी स्थिति असमंजस भरी हो गई है।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई निष्पक्ष होती तो सभी अवैध प्लाटिंग पर समान रूप से लगाम कसी जाती, लेकिन कुछ स्थानों पर प्रशासन की सक्रियता और कुछ जगहों पर खामोशी—इससे प्रशासनिक मंशा पर संदेह खड़ा हो गया है।
    सवालों के घेरे में तहसील प्रशासन की नीयत
    तहसीलदार नरेंद्र भाटिया द्वारा हाल ही में उच्चाधिकारियों को एक प्रार्थना पत्र देकर रजिस्ट्रार के कार्य से मुक्त होने का निवेदन किया गया था, जिसके बाद रजिस्ट्रार का चार्ज नायब तहसीलदार को सौंपा गया। इसके कुछ ही दिनों बाद उनका तबादला बांसवाड़ा हो जाना भी क्षेत्र में एक अलग चर्चा का विषय बन गया है।
    लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या यह सब सामान्य प्रक्रिया है या इसके पीछे कोई दबाव, प्रशासनिक मतभेद या फिर कोई बड़ा ‘राज’ छुपा है? यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या यह तबादला अवैध प्लाटिंग पर हो रही कार्रवाई से जुड़ा है या इसका कारण कुछ और है।
    क्या है प्रशासन की मंशा?
    प्रशासनिक पक्ष कहता है कि कार्रवाई का उद्देश्य सरकार को राजस्व की हानि से बचाना और भूमि उपयोग की वैधता सुनिश्चित करना है। लेकिन क्षेत्र में फैली चर्चाएं कुछ और संकेत दे रही हैं। कुछ भू-माफिया आपसी बातचीत में इस कार्रवाई को एक ‘सत्ता समीकरण’ का हिस्सा मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक बड़े खेल का शुरुआती हिस्सा बता रहे हैं।
    कुल मिलाकर किशनगढ़ बास में कृषि भूमि पर हो रही अवैध प्लाटिंग और प्रशासन की उस पर कार्रवाई अब केवल कानूनी विषय नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कार्रवाई वास्तव में नियम पालन की पहल थी या फिर इसके पीछे कोई अदृश्य रणनीति काम कर रही थी।

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