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    भोपाल: विधायक आरिफ मसूद को राहत, इंदिरा कॉलेज केस में SIT जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

    भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। मप्र हाईकोर्ट जबलपुर ने 4 दिन पहले एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी जांच के आदेश दिए थे, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया है। उनकी तरफ से कबिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने पक्ष रखा था। बता दें कि कॉलेज की मान्यता फर्जी दस्तावेज लगाकर लिए जाने संबंधी शिकायत पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह ने की थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भोपाल मध्य से विधायक आरिफ मसूद और इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता मामले को लेकर बड़ी राहत दी है। एससी में जस्टिस जेके माहेश्वरी की बैंच में मसूद की तरफ से अधिवक्ता कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा और वरुण तन्खा ने पक्ष रखते हुए जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश को लेकर तर्क रखे थे। कोर्ट ने सुनवाई के बाद जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर और एसआईटी जांच के आदेश पर स्टे जारी किया है।
      
    कॉलेज की मान्यता और फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा है मामला

    दरअसल भोपाल के खानू गांव में इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज स्थिति है। आरिफ मसूद इसकी समिति में सचिव हैं। कॉलेज की मान्यता को लेकर पूर्व विधायक ध्रुवरानायण शुक्ला ने शिकायत की थी कि कॉलेज प्रबंधन और समिति ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता ली है। मामले में जांच बाद उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त ने यह माना था कि अमन सोसाइटी ने कॉलेज संचालन के लिए फर्जी दस्तावेज के आधार पर एनओसी व मान्यता प्राप्त की थी।

    कोहेफिजा थाने में मसूद पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

    मामले में जबलपुर हाईकोर्ट की बैंच ने इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज मान्यता मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद बीते सोमवार को भोपाल कमिश्नर को आदेश दिए थे कि तीन दिन में एफआईआर दर्ज कराई जाए। इस मामले में एसआईजी जांच के आदेश कोर्ट ने दिए थे। इसके बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। इधर कॉलेज में नए प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

    हाईकोर्ट ने SIT से जांच व 90 दिन में रिपोर्ट मांगी है

    बता दें कि कॉलेज को कूटरचित व फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मान्यता मामले में हाईकोर्ट ने एसआईटी गठित कर जांच के आदेश देते हुए 90 दिन में एसआईटी को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। वहीं उच्च शिक्षा ने कॉलेज की मान्यता रद्द की दी थी, लेकिन विद्यार्थियों का हित देखते हुए कॉलेज में पढ़ाई को जारी रखा गया था। आरिफ मसूद कॉलेज की संचालन समिति में सचिव हैं।

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