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    “टैरिफ के असर से अमेरिकी रोजगार पर संकट, फ्रेड चेयरमैन्स ने ट्रम्प की मांग को ठुकराया”

    नई दिल्ली : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने ब्याज दर घटाने के संकेत तो दिए हैं, लेकिन कब घटाएंगे, इसको लेकर कोई समय नहीं दिया है. ट्रंप चाहते हैं कि फेड ब्याज दरों में जल्द से जल्द कटौती करे. पॉवेल ने कोई भी जल्दीबाजी नहीं की है.

    शुक्रवार को ब्याज दरों में कटौती को लेकर पॉवेल ने बड़ा इशारा किया. उन्होंने कहा कि टैरिफ ने अमेरिका के सामने ऐसी स्थिति बना दी है, कि फेड को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ सकती है. पॉवेल ने यह भी कहा कि कम दरों की वजह से लेबर मार्केट को फायदा मिलेगा. पिछले आठ महीनों से फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. लेकिन ब्याज दर तुरंत कम कर दिया जाए, इसके लिए वह तैयार नहीं हुए.

     

    ट्रंप मानते हैं कि अमेरिका में कोई भी महंगाई नहीं है, लिहाजा फेड को ब्याज दरों में कमी करनी चाहिए. ट्रंप का कहना है कि ब्याज दरों में कमी की वजह से सरकार को 37 ट्रिलियन के कर्ज को चुकाने में सहुलियत होगी. इसकी वजह से ब्याज दर कम होने की वजह से उन्हें भुगतान कम करना पड़ेगा.

    आपको बता दें कि फेड का यह बयान बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पॉवेल ने कहा, "कंज्यूमर प्राइस पर टैरिफ का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है और आने वाले महीनों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है. रोजगार के लिए नकारात्मक जोखिम बढ़ रहे हैं."

    फेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष के रूप में यह उनका आखिरी भाषण है, और निवेशक इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि ब्याज दरें किस दिशा में जा सकती हैं. पॉवेल के सामने सचमुच कठिन चुनौती है. उन्हें एक तरफ मुद्रास्फीति की भी चिंता करनी है, साथ ही दूसरी ओर रोजगार को भी बचाना है. रिपलब्लिकन पार्टी के सवाल लगातार उनके सामने बने ही हुए हैं. वे लगातार उनकी आलोचनाओं को झेल रहे हैं. पॉवेल ने साफ तौर पर कहा कि लेबर की मांग और आपूर्ति दोनों के बीच एक संतुलन दिख रहा है, लेकिन यह संतुलन अच्छा नहीं है, क्योंकि यह सबकुछ मांग और आपूर्ति दोनों की कमी की वजह से हुआ है.

     

    पॉवेल ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था पर टैरिफ का प्रभाव अब दिखने लगा है और आने वाले समय में यह और अधिक बढ़ेगा. उन्होंने कहा, "हम कीमतों में एकमुश्त वृद्धि को मुद्रास्फीति की समस्या नहीं बनने देंगे." फेड की अगली बैठक सितंबर महीने में होगी. उसी समय यह स्पष्ट हो सकेगा कि फेड ने ब्याज दर में कटौती की है या नहीं. पिछली बार दिसंबर महीने में फेड ने ब्याज दर में कटौती की थी. इस समय ब्याज दर 4.25 से 4.50 के बीच है.

    क्योंकि अभी तक जेरोम पॉवेल ने दरों में स्थिरता बनाए रखी है, लिहाजा नीति निर्माताओं ने लेबर मार्केट में फ्लेक्सिबिलिटी का हवाला दिया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कई विश्लेषकों ने भी इशारा किया है कि अचानक ही टैरिफ के बढ़ाए जाने से आयात महंगा हो गया है, लिहाजा इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है. इसे महसूस किया जा सकता है.

    अमेरिकी अर्थव्यवस्था की एक खासियत रही है कि वहां पर फेड इन्फ्लेशन को कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर रखते हैं. लेकिन टैरिफ ने सारा कैलकुलेशन बिगाड़ दिया है. अमेरिकी मुद्रास्फीति सूचकांक जून में पहले की तुलना में 2.6 फीसदी बढ़ा है.

    रोजगार मार्केट ने व्यवस्था में उन दरारों को उजागर कर दिया है, जो टैरिफ को लेकर पैदा हुई है. अब इकोनोमी को संभालने के लिए दरों में कटौती को आवश्यक माना जा रहा है. ट्रंप कई बार इसकी वकालत कर चुके हैं. मई और जून महीने के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके अनुसार नियुक्तियां अनुमान से कम हुई हैं. रोजगार में नमी आने की वजह से अधिकारी परेशान हैं.

    फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर और मिशेल बोमन ने ब्याज दरों को स्थिर रखने के खिलाफ मतदान किया था. यानि वे भी चाहते थे कि दरों को कम किया जाए, लेकिन पॉवेल इसके लिए तैयार नहीं थे. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि 1993 के बाद यह पहली बार था कि दो फेड गवर्नरों ने फैसले पर असहमति दिखाई, इसे असामान्य माना जाता है.

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