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    Farooq Abdullah के बयान पर विवाद, पंजाब ब्लास्ट केस ने पकड़ा तूल

    जम्मू: पंजाब में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के एक विवादित बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने धमाकों की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं और इसमें कुछ भी नया नहीं है। उनके इस रुख को बेहद असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसकी तीखी आलोचना की है।

    पंजाब में तीन घंटे के भीतर दो संदिग्ध विस्फोट

    मंगलवार की रात पंजाब के लिए बेहद तनावपूर्ण रही, जहाँ जालंधर और अमृतसर में महज तीन घंटे के अंतराल पर दो धमाके हुए। जालंधर में बीएसएफ (BSF) मुख्यालय के समीप एक स्कूटी में हुए जोरदार विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया; इसकी गूँज करीब डेढ़ किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। इस घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ है और संदिग्ध चालक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। दूसरी ओर, अमृतसर के खासा क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित बीएसएफ परिसर पर बाइक सवार नकाबपोशों ने विस्फोटक सामग्री फेंकी, जिससे वहां की दीवार और शेड को नुकसान पहुँचा है।

    सुरक्षा घेरा सख्त और एनआईए की सक्रियता

    इन संदिग्ध आतंकी गतिविधियों के बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड पर आ गईं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेषज्ञ टीमों ने घटनास्थल पर पहुँचकर साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बल संदिग्धों की धरपकड़ के लिए व्यापक तलाशी अभियान (सर्च ऑपरेशन) चला रहे हैं, ताकि किसी भी बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।

    अब्दुल्ला के बयान पर बढ़ता राजनीतिक विवाद

    जहाँ एक ओर एजेंसियां धमाकों के पीछे की साजिश को बेनकाब करने में जुटी हैं, वहीं फारूक अब्दुल्ला के बयान ने इस मुद्दे को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया है। सत्ता पक्ष और विपक्षी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उदासीनता का परिचायक बताया है। आलोचकों का तर्क है कि जब देश सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा हो, तब एक वरिष्ठ राजनेता की ओर से ऐसी टिप्पणी सुरक्षा बलों के मनोबल को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल, इन धमाकों के पीछे किसी स्थानीय नेटवर्क या सीमा पार की साजिश के पहलुओं पर गंभीरता से जांच की जा रही है।

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