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    हिंदू धर्म में फूट डालने का आरोप – उमंग सिंघार के आदिवासी बयान से मचा सियासी तूफ़ान, माफी की मांग तेज़

    बड़वानी: मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के 'आदिवासी हिंदू नहीं' वाले बयान पर बवाल मचा हुआ है। पश्चिम निमाड़ क्षेत्र के आदिवासी सांसदों ने इस पर पलटवार करते हुए सिंघार से माफी मांगने की बात कही है। क्षेत्र के राज्यसभा सांसद, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता और राष्ट्रीय नीति एवं शोध प्रभारी (एसटी) मोर्चा डॉ सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि आदिवासी हिंदू धर्म का अभिन्न अंग और सनातन संस्कृति को मानने वाले हैं। उन्होंने कहा कि वह प्रकृति पूजक और सनातन संस्कृति का वाहक हैं। आदिवासी समाज पगड़ी बांधता है, हनुमान भीलट देव, पीपल, तुलसी, जल अग्नि, वायु की पूजा करता हैं और यही हिंदुत्व है। उसकी संस्कृति और परंपरा हिंदुत्व के समान है। उन्होंने पूछा कि उमंग सिंघार को धर्म की व्याख्या करने का अधिकार किसने दिया। उन्हें पूरे देश के आदिवासी समाज से माफी मांगना चाहिए।

    बड़वानी सांसद ने अनुसार फूट डाल रही कांग्रेस
    खरगोन बड़वानी लोकसभा क्षेत्र से लोकसभा सांसद और भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री गजेंद्र सिंह पटेल ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस हिंदू धर्म में फूट डालने का प्रयास कर रही है। भारत के संविधान में आदिवासी समाज को हिन्दू समाज का अभिन्न अंग माना गया है तथा 1951 की जनगणना में भी इसी परिधि में हमारे आदिवासी समुदाय को गिना गया है।

    कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप
    उन्होंने कहा कि हम प्रकृति के पूजक हैं और हिन्दू समाज के सभी त्यौहार जिसमे दीपावली, होली, दशहरा, रक्षाबंधन आदि सभी प्रकार के हिन्दू त्यौहार मनाते हैं। उन्होंने कहा कि उमंग सिंघार जिस तरह से आदिवासी समाज को बरगलाने व बहकाने का काम कर रहे हैं, आदिवासी समाज इसको जान चुका है कि कांग्रेस पार्टी वोट बैंक की राजनीति करती है। आदिवासी समाज इस बात को बहुत अच्छी तरीके से जानता है कि वह हिंदू समाज का अभिन्न हिस्सा है।

    उमंग सिंघार से माफी की मांग
    अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के पुत्र और भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष विकास आर्य ने भी वक्तव्य की निंदा करते हुए उमंग सिंघार से माफी की मांग की है। उन्होंने कहा कि हमें गर्व है कि हम हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि हर ग्राम में महादेव, बजरंगबली, माता जी का मंदिर है। और प्रत्येक आदिवासी एक दूसरे से मिलने पर राम-राम का ही अभिवादन करता है।

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