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    Homeराज्यमध्यप्रदेशएमवाय अस्पताल की लापरवाही पर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग का संज्ञान

    एमवाय अस्पताल की लापरवाही पर राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग का संज्ञान

    इंदौर।  इंदौर के महाराजा यशवंतराव होलकर (एमवाय) अस्पताल में चूहों के काटने से दो नवजातों की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने कलेक्टर को नोटिस जारी कर 3 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई यूरेशिया-अफ्रीका वाणिज्य मंडल के वैश्विक अध्यक्ष डॉ. रोहित गुप्ता की शिकायत के आधार पर की गई। इससे पहले मध्य प्रदेश जन स्वास्थ्य अभियान ने भी आयोग से शिकायत की थी।

    हाई कोर्ट में आज पेश होगी रिपोर्ट

    मामले का संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सरकार को नोटिस देकर जवाब मांगा था। कोर्ट ने 5 दिन का समय दिया था, जिसकी अवधि सोमवार (15 सितंबर) को पूरी हो रही है। न्यायमूर्ति विवेक रुसिया और न्यायमूर्ति जे.के. पिल्लई की डबल बेंच ने इसे मौलिक अधिकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना था। कोर्ट ने पूछा है कि अब तक क्या कार्रवाई हुई, जिम्मेदारों पर क्या एक्शन लिया गया और अस्पताल की मौजूदा स्थिति क्या है।

    अस्पताल में ‘ऑपरेशन रैट किल’ शुरू

    घटना के बाद एमवाय अस्पताल प्रबंधन ने ‘ऑपरेशन रैट किल’ शुरू कर दिया है। डॉक्टर महेश कछारिया को असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट बनाकर पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। चूहों को पकड़ने के लिए पिंजरे, स्ट्रॉन्ग ग्लू ट्रैप और दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। डॉक्टर्स को हर 24 घंटे में पकड़े गए चूहों की रिपोर्ट भी देनी होगी।

    कार्रवाई: HoD हटाए गए, कंपनी पर जुर्माना

    सरकार ने लापरवाही मानते हुए डॉक्टर मनोज जोशी को निलंबित कर दिया है और पीडियाट्रिक विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट (HoD) को पद से हटा दिया गया है। अस्पताल की साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदार कंपनी एजाइल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का अनुरोध किया गया है।

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