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    हुक्का विवाद पर मनोज तिवारी का बड़ा बयान, धोनी और पठान को लेकर खोले राज

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम कल्चर को लेकर एक बार फिर से पुराना विवाद ताजा हो गया है। हाल ही में पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि वह धोनी के कमरे में जाकर हुक्का नहीं लगाते थे और इस वजह से उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। अब पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने धोनी के कथित 'हुक्का सेशंस' को लेकर बड़ा बयान दिया है। तिवारी ने भी खुलासा किया है कि उस दौर में कुछ खिलाड़ी धोनी के करीब होने के लिए उनके कमरे में होने वाले हुक्का सेशंस में शामिल होते थे।

    मनोज तिवारी का खुलासा
    मनोज तिवारी ने एक स्पोर्ट्स वेबसाइट से बातचीत में कहा, 'हमने खुद नजदीक से ये सब देखा है। ऐसे सेशंस होते थे जहां हुक्का लिया जाता था और वहां कुछ खिलाड़ी ही होते थे जो कप्तान के करीब थे। उस समय कुछ खिलाड़ी इतने स्मार्ट थे कि वे कप्तान को मक्खन लगाते थे ताकि कप्तान से मदद मिल सके।'

    तिवारी ने साफ किया कि यह किसी पर थोपे जाने वाली चीज नहीं थी। तिवारी ने कहा, 'यह जरूरी नहीं था कि हर कोई वहां जाए। सिर्फ वही खिलाड़ी वहां जाते थे जिन्हें पता होता था कि कमरा हुक्के के लिए खुला है।'

    'कप्तान का दरवाजा हमेशा खुला, लेकिन…'
    तिवारी ने कहा कि धोनी का दरवाजा हमेशा सबके लिए खुला रहता था लेकिन ज्यादातर वही खिलाड़ी वहां जाते थे जो उनके करीब होते थे। तिवारी ने कहा, 'जो खिलाड़ी कप्तान के करीबी थे या समझदार थे, वही जानते थे कि दरवाजा सबके लिए खुला है।'

    इरफान पठान के बयान के बाद बढ़ा मामला
    तिवारी का यह बयान उसी विवाद को हवा दे रहा है जो हाल ही में इरफान पठान ने उठाया था। पठान ने पांच साल पहले टीम इंडिया के हुक्का कल्चर का जिक्र करते हुए कहा था कि 'मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो किसी के कमरे में हुक्का लगाकर उसे खुश करने जाए।'

    पठान ने हुक्का को लेकर कही थी यह बात
    पठान ने 2012 में टीम से बाहर होने के लिए धोनी का नाम लिए बिना उन्हें जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था, 'मुझे किसी के कमरे में हुक्का लगाने या बेवजह बातें करने की आदत नहीं है। सब जानते हैं। कई बार चुप रहना बेहतर होता है। मेरा काम मैदान पर प्रदर्शन करना था और मैंने वही किया।' पठान ने 2012 में आखिरी बार भारत के लिए खेला था। उस मैच में उन्होंने पांच विकेट भी लिए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें टीम में जगह नहीं मिली। लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि आखिर उन्हें बाहर क्यों किया गया। 

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