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    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता नजदीक, टैरिफ में 16% तक संभावित कटौती

    व्यापार: भारत और अमेरिका के बीच बहु-प्रतीक्षित व्यापार समझौते पर जल्द ही मुहर लग सकती है। मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर वर्तमान में लगाए जा रहे भारी-भरकम 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 15-16 फीसदी तक किया जा सकता है।

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में ऊर्जा और कृषि प्रमुख केंद्र बिंदु हैं। सूत्रों ने संकेत दिया है कि इस डील के तहत भारत धीरे-धीरे रूसी कच्चे तेल के आयात में कमी लाने पर सहमत हो सकता है। अमेरिका ने रूसी तेल खरीद के कारण ही भारतीय निर्यात पर 25 फीसदी का दंडात्मक शुल्क लगाया था, जो 25 फीसदी के टैरिफ के अतिरिक्त था। रूस से तेल आयात अभी भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 34 फीसदी है। भारत अपनी मौजूदा तेल और गैस जरूरतों का लगभग 10 फीसदी (मूल्य के हिसाब से) अमेरिका से आयात करता है।

    व्यापार समझौते पर वाणिज्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अधिकारी बातचीत कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि समझौते की व्यापक रूपरेखा तैयार है, लेकिन कृषि और ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में घोषणा से पहले उच्चस्तरीय राजनीतिक मंजूरी की जरूरत है।

    अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुलेगा बाजार
    सूत्रों के मुताबिक, समझौते के तहत भारत गैर-आनुवंशिक रूप से संशोधित (गैर-जीएम) अमेरिकी मक्का और सोयामील के लिए अपने बाजार की पहुंच बढ़ा सकता है। चीन की ओर से अमेरिकी मक्का आयात में भारी कटौती के बाद, अमेरिका नए खरीदारों की तलाश में है। इसी तरह पोल्ट्री, डेयरी और इथेनॉल उद्योगों की बढ़ती घरेलू मांग को देखते हुए, भारत अमेरिका से गैर-जीएम मक्का आयात का कोटा बढ़ाने पर विचार कर रहा है, हालांकि इस पर 15 फीसदी का शुल्क अपरिवर्तित रहेगा। गैर-जीएम सोयामील के आयात की अनुमति पर भी बात चल रही है। अमेरिकी टीम की प्रमुख मांग रही उच्चस्तरीय चीज सहित डेयरी उत्पादों पर टैरिफ कटौती पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

    आसियान सम्मेलन में एलान संभव
    सूत्रों के मुताबिक, इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा इस माह के अंत में होने वाले आसियान शिखर सम्मेलन में किए जाने की संभावना है। हालांकि, सम्मेलन में पीएम मोदी के भाग लेने की उम्मीद कम ही है। 26 से 28 अक्तूबर तक क्वालालंपुर में हो रहे सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर शिरकत कर सकते हैं। 

    ऊर्जा नीति में बदलाव की तैयारी
    समझौते के लिए भारतीय पक्ष रूसी तेल आयात कम करने के लिए तैयार दिख रहा है। यह बदलाव किसी औपचारिक घोषणा के बजाय सरकारी तेल कंपनियों को कच्चे तेल के आयात को अमेरिका सहित अन्य स्थानों की ओर मोड़ने की सलाह देकर किया जाएगा। सूत्रों ने बताया, भारत ने मॉस्को को इस कटौती के बारे में जानकारी भी दे दी है।

    द्विपक्षीय व्यापार में तेजी जारी
    आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पिछले वित्त वर्ष में 137 अरब डॉलर के कच्चे तेल का आयात किया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारत-अमेरिका व्यापार 71.41 अरब डॉलर रहा जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि से 11.8 फीसदी ज्यादा है। इस अवधि में अमेरिका को भारत का निर्यात 13.4 फीसदी से बढ़कर 45.82 अरब डॉलर हो गया।

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