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    प्याज ने किसानों की आंखों से निकाले आंसू — किसान महापंचायत अध्यक्ष रामपाल जाट

    किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि प्याज के दामों में 49.5% की गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने 17 नवंबर को प्रदेशभर में धरना और 30 दिसंबर को “अन्नदाता हुंकार रैली” आयोजित करने की घोषणा की।

    मिशनसच न्यूज, जयपुर ।
    देशभर में प्याज की कीमतों में आई भारी गिरावट को लेकर किसान महापंचायत ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि प्याज के दामों में आई 49.5% की गिरावट ने किसानों की आंखों से आंसू निकाल दिए हैं।

    उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 के फरवरी माह के बाद सितंबर 2025 में प्याज के दामों में यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी पुष्टि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) ने भी की है। यह गिरावट सरकार की आयात-निर्यात नीति और बाजार प्रबंधन की विफलता का परिणाम है।

    किसानों को 5 रुपये किलो में प्याज बेचने को विवश

    जाट ने कहा कि सरकार के अनुसार प्याज की उत्पादन लागत 8 से 10 रुपये प्रति किलो है, जबकि किसानों के अनुसार वास्तविक लागत 18 से 20 रुपये प्रति किलो पड़ती है। इसके बावजूद किसानों को खैरथल मंडी में प्याज 5 रुपये किलो में बेचने को विवश होना पड़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे राज्य, जहां देश का 35% प्याज उत्पादन होता है, वहां भी अति-वृष्टि से फसलें नष्ट हो गईं, फिर भी सरकार आंकड़ों में यह बता रही है कि आपूर्ति अधिक होने के कारण दाम गिरे। यह दावा पूरी तरह भ्रामक है।

    बाजार हस्तक्षेप योजना पर सरकार चुप

    किसान नेता ने कहा कि जिन उपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय नहीं होता, उनके संरक्षण के लिए सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) बनाई थी, लेकिन प्याज किसानों की मदद के लिए अब तक कोई कार्यवाही शुरू नहीं हुई है।

    इसी तरह मक्का, उड़द, मूंगफली, मूंग, बाजरा, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों पर भी किसानों को एमएसपी से कम कीमतों पर फसल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। कई मामलों में किसानों को प्रति क्विंटल 3000 रुपये तक का घाटा उठाना पड़ रहा है।

    सरकारें MSP गारंटी कानून बनाने से पीछे हट रही हैं

    रामपाल जाट ने कहा कि “कृषि क्षेत्र में स्थायित्व तभी आ सकता है जब सरकार एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाए।”
    उन्होंने अफसोस जताया कि केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारें इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहीं।

    किसान महापंचायत की प्रदेश स्तरीय आंदोलन योजना

    जाट ने बताया कि राजस्थान सरकार के साथ 3 अक्टूबर को हुई बैठक में किसानों की कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। इसी असंतोष के चलते किसान महापंचायत ने निर्णय लिया है कि
    17 नवंबर (सोमवार) को जयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदेश कार्यसमिति धरना देगी, जबकि जिला समितियां जिला मुख्यालयों पर धरना आयोजित करेंगी।

    इसके अतिरिक्त, पहले 6 अक्टूबर को निर्धारित “अन्नदाता हुंकार रैली” को स्थगित किया गया था, जिसे अब 30 दिसंबर 2025 को जयपुर में आयोजित किया जाएगा।

    बैठक में कई जिलों के पदाधिकारी रहे उपस्थित

    लाल कोठी स्थित किसान भवन में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घासीराम फगोड़िया एवं रोतास बोहरा, प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, उपाध्यक्ष गोपीराम डबास, महामंत्री सुंदरलाल भावरिया और जगदीश नारायण खुडियाला, मंत्री भल्लाराम एवं मनजिंदर सिंह अटवाल, युवा अध्यक्ष रामेश्वर चौधरी, तथा जयपुर, खैरथल-तिजारा और टोंक जिलों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    अंत में, किसान महापंचायत ने स्पष्ट किया कि अगर सरकार किसानों की फसलों के लिए उचित दाम और समर्थन मूल्य की गारंटी नहीं देती, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर बढ़ाया जाएगा।

    – गोपाल सैनी, कार्यालय सचिव, किसान महापंचायत

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