अलवर के होलसेल दवा विक्रेताओं ने सहकारी भंडार कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप—2014 से 3–4 करोड़ रुपए के बिल पेंडिंग। व्यापारियों ने चेताया—भुगतान नहीं मिला तो होगा उग्र आंदोलन।
मिशनसच न्यूज, अलवर।
अलवर में सहकारी उपभोक्ता भंडार के खिलाफ होलसेल दवा विक्रेताओं का गुस्सा गुरुवार को खुलकर सामने आया। दवा व्यापार से जुड़े कई होलसेल विक्रेता भंडार कार्यालय पहुंचे और पेंडिंग भुगतानों की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विक्रेताओं का आरोप है कि सहकारी भंडार पिछले कई वर्षों से उनका भुगतान रोककर बैठा है, जिससे व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
2014 से पेंडिंग करोड़ों के बिल
दवा व्यापारी रिंकू खुराना ने बताया कि अलवर जिले के कुल 31 होलसेल दवा विक्रेताओं के बिल 2014 से लगातार पेंडिंग हैं। इनका कुल भुगतान लगभग 3 से 4 करोड़ रुपए बताया जा रहा है।
व्यापारियों के अनुसार इतने लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण उनका व्यापार प्रभावित हुआ है और वे आर्थिक रूप से बेहद परेशान हैं।
खुराना ने कहा कि कई बार भंडार प्रबंधन, संबंधित अधिकारियों और मंत्री तक अपनी शिकायतें पहुंचाई गईं, लेकिन आज तक किसी ने इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की।
“हमारी सुनवाई कोई नहीं कर रहा। मजबूर होकर हमें सड़क पर उतरना पड़ा है।”
— रिंकू खुराना
भंडार अधिकारियों से हुई मुलाकात
प्रदर्शन के दौरान दवा विक्रेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने भंडार अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्या विस्तार से रखी। व्यापारियों ने कहा कि हर बार भंडार की ओर से सिर्फ आश्वासन मिलता है—
“जल्द भुगतान किया जाएगा।”
लेकिन महीनों और सालों तक कोई प्रगति नहीं होती।
दवा विक्रेताओं का कहना है कि यदि भंडार तुरंत भुगतान नहीं करता तो उन्हें उग्र प्रदर्शन करना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है और व्यापारी एकजुट होकर जिला मुख्यालय पर धरना भी दे सकते हैं।
विक्रेताओं का दर्द:
व्यापारियों के अनुसार भंडार के पास किए गए सप्लाई का भुगतान रुका होने से उनकी वित्तीय स्थिति बिगड़ गई है। कई व्यापारियों का कहना है कि उनका पूरा व्यापार ठप होने की कगार पर है, क्योंकि
नए स्टॉक की खरीद नहीं कर पा रहे,
बैंक लोन और ब्याज का दबाव बढ़ गया है,
कई जगह खुद भुगतान नहीं कर पा रहे।
दवा विक्रेताओं ने कहा कि सरकार खुद उपभोक्ता हित और पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन जब व्यापारियों की बकाया राशि वर्षों तक रोकी जाती है तो यह सीधा नुकसान व्यापार जगत को होता है।
भंडार अधिकारियों का जवाब
प्रदर्शन के दौरान भंडार अधिकारियों ने व्यापारियों को आश्वस्त किया कि पेंडिंग बिलों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही भुगतान करवाने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि व्यापारी इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिखे और कहा कि वे लिखित में समयसीमा चाहते हैं।
आंदोलन की चेतावनी
व्यापारियों ने साफ कहा कि अगर एक निर्धारित समयसीमा में भुगतान नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे।
“इस बार सिर्फ आश्वासन नहीं, भुगतान चाहिए। नहीं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।”
— दवा विक्रेता प्रतिनिधि मंडल
आम जनता पर भी असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दवा विक्रेताओं और भंडार के बीच मुद्दा नहीं सुलझा तो इसका असर सामान्य जनता पर भी पड़ सकता है, क्योंकि सप्लाई चेन बाधित होती है तो सरकारी भंडार से होने वाली दवा वितरण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अलवर सहकारी भंडार से जुड़े इस मामले ने प्रशासन और व्यापार जगत दोनों में हलचल पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में भुगतान प्रक्रिया पर सबकी नजरें रहेंगी।


