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    Homeराज्यछत्तीसगढ़सुव्यवस्थित और डिजिटल व्यवस्था से बढ़ा किसानों का भरोसा

    सुव्यवस्थित और डिजिटल व्यवस्था से बढ़ा किसानों का भरोसा

    रायपुर : बेमेतरा के ग्राम करेसरा के किसान भगवानी राम ने इस साल समर्थन मूल्य पर 80 क्विंटल धान बेचा है। राज्य शासन द्वारा धान खरीदी के लिए की गई सुचारू, पारदर्शी और किसान हितैषी व्यवस्था से उन्हें अपना धान बेचने में कोई परेशानी नहीं हुई। धान उपार्जन केंद्र में पहुंचने पर तौल से लेकर भुगतान तक हर चरण में सुगम व्यवस्था के कारण भगवानी राम जैसे किसानों का व्यवस्था पर विश्वास और भी मजबूत हुआ है। डिजिटल टोकन, सुव्यवस्थित तौलाई, पारदर्शी गुणवत्ता परीक्षण तथा समय पर भुगतान की गारंटी किसानों की मेहनत को सही मूल्य दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    भगवानी राम बताते हैं कि इस बार खरीदी केंद्र की व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुव्यवस्थित थी। लंबी लाइनों से मुक्ति, तौलाई में पारदर्शिता, समय पर टोकन, शेड, पीने का पानी और आराम जैसी सुविधाओं ने किसानों के लिए धान बेचने की प्रक्रिया को आसान और तनावमुक्त बना दिया है।

    आर्थिक उन्नति की ओर कदम

    80 क्विंटल धान बेचने से प्राप्त होने वाली राशि का उपयोग भगवानी राम अपने परिवार और कृषि के विकास के लिए करना चाहते हैं। वे इस कमाई को खेती के लिए आधुनिक उपकरण खरीदने, अगली फसल के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज व उर्वरकों की व्यवस्था करने, सिंचाई सुविधाओं में सुधार तथा घर की जरूरतों व बच्चों की शिक्षा में निवेश जैसे कार्यों में उपयोग करने की योजना बना रहे हैं।                        

    वे कहते हैं कि फसल से हुई आय ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि भविष्य की खेती के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। शासन की किसान हितैषी नीतियों और प्रशासन की सक्रियता से किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। भगवानी राम की कहानी अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत है कि अनुशासित मेहनत, वैज्ञानिक विधियों और सरकारी समर्थन से खेती में आर्थिक उन्नति के नए अवसर प्राप्त किए जा सकते हैं। भगवानी राम की कहानी बताती है कि जब व्यवस्था पारदर्शी हो और किसानों को उनका हक समय पर मिले, तो मेहनत समृद्धि में बदल जाती है।

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