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    सबूत सामने : झारखंड देसी शराब घोटाले में विनय चौबे का नाम..ACB डायरी में दर्ज हैं कमीशन के सारे राज…अब होगी कार्रवाई?

    Jharkhand Desi Liquor Scam से जुड़ी ACB की जांच लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रही है। ताज़ा केस डायरी में यह सामने आया है कि झारखंड में घटिया और कम गुणवत्ता वाली देसी शराब की आपूर्ति के बदले सप्लाई कंपनियों से 300 से 600 रुपये प्रति पेटी तक कमीशन वसूला जाता था। इस अवैध वसूली में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे और छत्तीसगढ़ के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका का उल्लेख केस डायरी में किया गया है।

    ACB की जांच के अनुसार झारखंड में देसी शराब की सप्लाई मुख्य रूप से तीन कंपनियों—मेसर्स छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी, ओम साई बेवरेज और दीशिता वेंचर्स—के हाथों में थी। शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया के बयान के आधार पर यह जानकारी दर्ज की गई कि ये कंपनियां टेंडर की शर्तें पूरी किए बिना काम कर रही थीं। सात मई 2022 को तत्कालीन संयुक्त निदेशक गजेंद्र सिंह ने इन्हें सप्लाई की अनुमति दी, जिसे जांच टीम एक साजिश का हिस्सा मान रही है।

    केस डायरी में यह भी दर्ज है कि ओम साई बेवरेज और दीशिता वेंचर्स केवल उन्हीं ब्रांड कंपनियों से शराब खरीदती थीं जो सबसे ज्यादा कमीशन देती थीं। इसकी वजह से लोकप्रिय और गुणवत्तापूर्ण ब्रांड बाजार से गायब हो गए और राज्य सरकार को करीब 136 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।

    जांच में विनय चौबे को इस पूरे रैकेट का मुख्य केंद्र बताया गया है। आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ के मॉडल को झारखंड में लागू कर कंपनियों को फायदा पहुंचाया। इस दौरान FL-10 थोक लाइसेंस नीति भी लागू की गई, जिससे छत्तीसगढ़ की डिस्टिलरियों को बड़ा लाभ मिला।

    ACB अब इस Jharkhand Desi Liquor Scam में मनी ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है। विनय चौबे, संबंधित अधिकारियों और कंपनियों के बीच पैसों की आवाजाही की पुष्टि हो चुकी है। आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासों की संभावना है।

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