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    260 जिंदगियों की याद में नम हुआ गुजरात, विमान दुर्घटना की पहली बरसी मनाई गई

    अहमदाबाद। गुजरात के इतिहास की सबसे दर्दनाक विमान त्रासदियों में से एक को आज पूरा एक वर्ष बीत चुका है। पिछले साल आज ही के दिन (12 जून) अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का विमान 'एआई171' उड़ान भरते ही मेघाणीनगर स्थित बी. जे. मेडिकल कॉलेज की मेस पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस भीषण हादसे ने कुल 260 मासूम जिंदगियों को लील लिया था, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। आज इस हादसे की पहली बरसी पर समूचे राज्य में अत्यंत भावुक माहौल देखा गया और लोगों ने मृतकों को याद किया।

    बी. जे. मेडिकल कॉलेज में भावभीनी श्रद्धांजलि सभा

    विमान हादसे की पहली बरसी के मौके पर दुर्घटनास्थल यानी बी. जे. मेडिकल कॉलेज परिसर में एक विशेष शोक सभा का आयोजन किया गया। इस प्रार्थना कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय विजय रूपाणी की सुपुत्री राधिका मिश्रा विशेष रूप से शामिल हुईं। उन्होंने अपने पिता और विमान में सवार अन्य सभी मृत यात्रियों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान वहां मौजूद परिजनों और आम नागरिकों की आंखें नम हो गईं और लोगों ने मौन रखकर दिवंगतों को नमन किया।

    सामाजिक कार्यों और सेवा के जरिए अपनों को किया याद

    इस दुखद अवसर को केवल शोक तक सीमित न रखते हुए स्वर्गीय विजय रूपाणी की बेटी राधिका मिश्रा ने समाज सेवा के कार्यों के जरिए अपने पिता को श्रद्धांजलि दी। कॉलेज परिसर में उनकी देखरेख में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, साथ ही पर्यावरण का संदेश देते हुए बड़े पैमाने पर पौधे रोपे गए। राधिका मिश्रा ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता आज भी अपनी जनसेवा के कारण लोगों के दिलों में बसते हैं और वे उनके विकास एवं जनकल्याण के सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगी।

    विमानन सुरक्षा मानकों और घनी आबादी के बीच निर्माण पर बहस

    इस भयावह दुर्घटना को एक साल बीत जाने के बाद भी चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में मौजूद निशान उस खौफनाक मंजर की याद दिला देते हैं। इस बरसी पर एक बार फिर रिहायशी और संवेदनशील इलाकों के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्गों तथा विमानन सुरक्षा के कड़े नियमों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि प्रशासन और सामाजिक संगठन प्रभावित परिवारों को संबल देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अपनों को असमय खोने का गम आज भी परिवारों के दिलों में ताजा है।

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