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    भोपाल मेट्रो का जोश 15 दिन में ठंडा, पैसेंजर न मिलने से बदला शेड्यूल, दोपहर से शाम तक दौड़ेगी ट्रेन

    भोपाल: राजधानी भोपाल में जल्दबाजी में शुरू की गई मेट्रो सेवा अब सवालों के घेरे में है. एक ओर मेट्रो स्टेशनों और रूट को लेकर खामियां सामने आईं, तो दूसरी ओर आधे-अधूरे कॉरिडोर पर चलाई जा रही मेट्रो अब सवारी की कमी से जूझ रही है. हालत यह है कि संचालन के महज 15 दिन में ही भोपाल मेट्रो की रफ्तार थमने लगी है और संचालन समय व ट्रिप में कटौती करनी पड़ रही है.

    21 दिसंबर से आम यात्रियों के लिए शुरु हुआ था संचालन
    भोपाल मेट्रो को 20 दिसंबर 2025 को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरी झंडी दिखाकर किया था. जबकि इसके अगले दिन 21 दिसंबर से आम जनता के लिए मेट्रो के गेट खोल दिए गए. शुरुआती एक-दो दिन लोगों में उत्सुकता दिखी और करीब 5 से 6 हजार यात्रियों ने मेट्रो में सफर किया. लेकिन यह उत्साह ज्यादा दिन टिक नहीं सका. दिन गुजरने के साथ यात्रियों की संख्या लगातार घटती चली गई.

    अब सुबह 9 बजे से नहीं होगा संचालन
    वर्तमान में स्थिति यह हो गई कि अब रोजाना केवल 500 से 800 यात्री ही मेट्रो का इस्तेमाल कर रहे हैं. कई बार पूरी की पूरी ट्रेन बिना यात्रियों के ही स्टेशन से गुजरती नजर आ रही है. यात्रियों की इस भारी कमी ने मेट्रो कॉर्पोरेशन की चिंता बढ़ा दी है. इसी के चलते भोपाल मेट्रो कॉर्पोरेशन ने संचालन शेड्यूल में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है. अब सुबह 9 बजे की जगह दोपहर 12 बजे से मेट्रो का संचालन होगा.

    अब दोपहर से शाम तक 13 ट्रिप चलेगी
    टाइम टेबल में बदलाव के साथ भोपाल मेट्रो में ट्रिप की संख्या भी 17 से घटाकर 13 कर दी गई है. नया शेड्यूल 5 जनवरी यानि आज से प्रभावी रहेगा. नए शेड्यूल के अनुसार, मेट्रो दोपहर 12 बजे से शाम साढ़े 7 बजे तक ही चलेगी. पहली ट्रेन दोपहर 12 बजे एम्स स्टेशन से रवाना होकर 12 बजकर 25 मिनट पर सुभाष नगर स्टेशन पहुंचेगी. इसके बाद 12 बजकर 40 मिनट पर सुभाष नगर से रवाना होकर 1 बजकर 5 मिनट पर एम्स पहुंचेगी. इस तरह मेट्रो लगभग 75 मिनट के अंतराल में अपनी राउंड ट्रिप पूरी करेगी.

    इस तरह घटता गया यात्रियों का ग्राफ
    यात्रियों के आंकड़े भी मेट्रो की गिरती साख को बयां कर रहे हैं. 21 दिसंबर से 2 जनवरी तक कुल 29 हजार यात्रियों ने भोपाल मेट्रो में सफर किया. पहले दिन 6 हजार 568 यात्रियों ने मेट्रो का इस्तेमाल किया. 22 दिसंबर को 2 हजार 896 यात्रियों. 23 को 2 हजार 163 यात्रियों, 24 को 1 हजार 787 यात्रियों, 25 को 4 हजार 264 यात्रियों, 26 को 1 हजार 473 यात्रियों, 27 को 1200 यात्रियों, 28 को 2 हजार 349 यात्रियों, 29 को 1100 यात्रियों, 30 को 967 यात्रियों, 31 को 1 हजार 113 यात्रियों, एक जनवरी को 2 हजार 23 और दो जनवरी को सिर्फ 1 हजार 65 यात्रियों ने ही सफर किया.

     

    सवारियों को आकर्षित करना बड़ी चुनौती
    आर्किटेक्ट और टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि, ''भोपाल में मेट्रो जिस मार्ग पर चल रही है, वहां मेट्रो के अलावा बस व अन्य साधन भी मौजूद हैं. इसके साथ ही भोपाल मेट्रो में एम्स से सुभाष नगर तक करीब 7 किलोमीटर पहुंचने में 35 से 40 मिनट लग रहे हैं. जबकि इसी मार्ग पर महज 10 से 15 मिनट में किसी अन्य परिवहन से पहुंचा जा सकता है.'' कुलश्रेष्ठ ने कहा कि, ''इतने कम समय में शेड्यूल बदलने और ट्रिप घटाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी मेट्रो को लेकर तंज कसे जा रहे हैं. फिलहाल भोपाल मेट्रो के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को आकर्षित करना और नियमित सवारी बढ़ाना है.''

    शाम को 30 मिनट बढ़ाया गया मेट्रो का समय
    भोपाल मेट्रो के समय में बदलाव क्यों किया गया है, इसको लेकर कोई भी अधिकारी बयान देने से बच रहे हैं. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पेारेशन के एमडी कृष्णा चैतन्य का कहना है कि, ''सुबह ठंड के कारण लोग कम निकलना पसंद कर रहे हैं. जिससे सुबह के समय लोगों की संख्या कम रहती है. लेकिन दोपहर के बाद सवारियों की भीड़ बढ़ती है. इसलिए पहले मेट्रो का संचालन शाम 7.25 बजे तक किया जा रहा था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 7.55 बजे तक किया गया है.''

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