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    पंचायती राज ने पहचान दी, ‘VB-G RAM’ के समर्थन से उसी का गला घोंटने के ब्रांड एंबेसडर बने मुख्यमंत्री: टीकाराम जूली

    VB-G RAM’ ग्रामीण लोकतंत्र, मनरेगा और पंचायती राज व्यवस्था की मूल आत्मा पर सीधा प्रहार

    मिशनसच न्यूज,   जयपुर। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा द्वारा ‘विकसित भारत–ग्राम (VB-G RAM)’ योजना के समर्थन में की गई प्रेस ब्रीफिंग पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण लोकतंत्र, मनरेगा और पंचायती राज व्यवस्था की मूल आत्मा पर सीधा प्रहार है तथा मुख्यमंत्री इसका “ब्रांड एंबेसडर” बनकर दिल्ली के हितों का प्रचार कर रहे हैं।

    पंचायती राज के साथ विश्वासघात

    जूली ने कहा, “विडंबना यह है कि जिस पंचायती राज व्यवस्था से मुख्यमंत्री ने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया, आज उसी के अधिकारों को सीमित करने वाली योजना के समर्थन में वे खड़े दिखाई दे रहे हैं। गांवों को उनसे जो उम्मीद थी, वे उसके विपरीत दिशा में काम कर रहे हैं। यह ऐतिहासिक विश्वासघात है।”

    मुख्यमंत्री या दिल्ली के संदेशवाहक?

    नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राजस्थान के हितों की आवाज बनने के बजाय केवल दिल्ली के ‘संदेशवाहक’ बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण परिवेश से होने का दावा करने वाले भजनलाल शर्मा अब मनरेगा और ग्रामीण स्वशासन के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं।

    राजस्थान पर लादेगा 40% अतिरिक्त आर्थिक बोझ

    फंडिंग पैटर्न में बदलाव पर चिंता जताते हुए जूली ने कहा कि अब तक मनरेगा का व्यय केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन नई व्यवस्था में खर्च को 60:40 अनुपात में बांटकर राज्यों पर 40 प्रतिशत बोझ डालना तानाशाही निर्णय है। इससे राजस्थान पर लगभग 40 प्रतिशत अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा, विकास योजनाएँ प्रभावित होंगी और संघीय ढांचे की भावना कमजोर होगी।

    अधिकार आधारित कानून का खात्मा

    उन्होंने कहा कि मनरेगा एक राइट-बेस्ड एक्ट था, जिसने गांवों में रोजगार का कानूनी अधिकार दिया, पलायन रोका और महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान किया। ‘VB-G RAM’ इसे केंद्र की मर्जी पर निर्भर योजना में बदलना चाहती है। भाजपा को गांधीवादी विचारधारा और मनरेगा, दोनों खटकते हैं, इसलिए नाम बदलकर गरीबों का हक छीना जा रहा है।

    सदन से सड़क तक होगा विरोध

    जूली ने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस जनविरोधी नीति का विधानसभा से लेकर सड़क तक कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने सवाल किया, “क्या मुख्यमंत्री दिल्ली की कुर्सी बचाने के लिए प्रदेश के गरीब मजदूरों के हितों की बलि चढ़ा देंगे?”

    खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करें मुख्यमंत्री

    अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि सरकार को दो साल पूरे होने को हैं, इसलिए एकतरफा प्रेस ब्रीफिंग के बजाय मुख्यमंत्री को हिम्मत दिखाकर खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए और पत्रकारों के सवालों का सामना करना चाहिए, तभी सरकार की वास्तविक मंशा जनता के सामने आ सकेगी।

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