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    अलवर की रेल उपेक्षा अब असहनीय :एनसीआर में शामिल होकर भी बुनियादी रेल सुविधाओं से वंचित

    एनसीआर में लोकल ट्रेन क्यों नहीं

    अलवर। दिल्ली–जयपुर रेलखंड का प्रमुख, ऐतिहासिक और सामरिक महत्व रखने वाला शहर अलवर आज भी रेलवे की उपेक्षा तथा राजनीतिक उदासीनता का दंश झेल रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सम्मिलित होने के बावजूद अलवर से दिल्ली के लिए आज तक कोई लोकल/ईएमयू ट्रेन संचालित नहीं हुई, जबकि पलवल, रेवाड़ी, सोनीपत और गाजियाबाद जैसे समीपवर्ती शहरों को यह सुविधा वर्षों से उपलब्ध है। इससे लाखों दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों और कामकाजी नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

    रेल विकास संघर्ष समिति, अलवर (RVSS) के अध्यक्ष कमल कान्त खड़िया ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग पाँच लाख की आबादी, सरिस्का टाइगर रिज़र्व जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल, विस्तृत औद्योगिक क्षेत्र, प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान तथा दिल्ली–एनसीआर से बड़े पैमाने पर होने वाले रोज़ाना आवागमन के बावजूद अलवर को रेल सुविधाओं में लगातार पीछे धकेला जा रहा है। दिल्ली से नजदीकी होने के बाद भी लोकल कनेक्टिविटी न होना एनसीआर की मूल भावना के विपरीत है।

    समिति ने विशेष रूप से अलवर–मथुरा रेलखंड की दीर्घकालीन उपेक्षा पर चिंता जताई। बयान में बताया गया कि पिछले लगभग 25 वर्षों से इस महत्वपूर्ण सेक्शन पर केवल पाँच पैसेंजर ट्रेनें ही चल रही हैं, जिनमें से मात्र एक ट्रेन मथुरा से आगे प्रयागराज तक जाती है, शेष सभी वहीं से लौट आती हैं। जबकि यही मार्ग अलवर को हावड़ा (कोलकाता), ग्वालियर, झांसी, भोपाल, नागपुर, उज्जैन, हैदराबाद, बेंगलुरु सहित देश के अनेक महानगरों से सीधे जोड़ने की अपार संभावनाएँ रखता है। परंतु इस दिशा में न नई ट्रेनें दी गईं और न इस सेक्शन को प्राथमिकता मिली।

    खड़िया ने कहा, “दिल्ली–जयपुर रेलखंड पर अलवर सबसे महत्वपूर्ण स्टेशनों में से एक है, फिर भी स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस का ठहराव नहीं दिया गया। अलवर से उज्जैन, श्रीगंगानगर, ग्वालियर/झांसी, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। यात्रियों को जयपुर या दिल्ली जाकर गाड़ी पकड़नी पड़ती है, जिससे समय, धन और ऊर्जा की भारी बर्बादी होती है। यह लाखों लोगों के साथ सीधा अन्याय है।”

    RVSS का मानना है कि अलवर की वर्षों पुरानी रेल मांगें फाइलों में दबती आ रही हैं और उन्हें न तो अपेक्षित राजनीतिक संबल मिला और न ही रेलवे की प्राथमिकता सूची में स्थान। एनसीआर क्षेत्र का शहर होने के कारण अलवर को दिल्ली से लोकल ट्रेनों की तत्काल आवश्यकता है, ताकि रोजगार, व्यापार और शिक्षा को गति मिल सके।

    समिति ने स्पष्ट किया कि अब यह चुप्पी असहनीय है और रेल उपेक्षा के मुद्दे को राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा। RVSS ने प्रशासन एवं रेलवे मंत्रालय से निम्न प्रमुख मांगें रखी हैं—

    1. अलवर से दिल्ली के लिए सुबह–शाम लोकल/ईएमयू ट्रेन का संचालन,

    2. स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस का अलवर जंक्शन पर ठहराव,

    3. अलवर–मथुरा मार्ग से होकर लंबी दूरी की नई ट्रेनों की शुरुआत।

    अंत में समिति ने कहा कि यह केवल रेल का प्रश्न नहीं, बल्कि न्याय, समानता और संतुलित क्षेत्रीय विकास का मुद्दा है, जिस पर त्वरित निर्णय लिया जाना चाहिए।

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