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    एमपी मंत्रालय में मची खलबली…आखिर क्यों मंत्रियों को नहीं मिल रहे ‘धोबी और कबाड़ी’? वीआईपी केबिन में बैठना हुआ दूभर

    MP News: मध्य प्रदेश के मंत्रियों और अधिकारियों के केबिनों के ताले, अलमारियां और ड्रॉअर खराब पड़े हुए हैं. हैरत की बात यह है कि सामान्य प्रशासन विभाग पिछले चार महीने से मैकेनिक की तलाश में जुटा हुआ है, लेकिन अब तक कोई भी एजेंसी या मैकेनिक इस काम के लिए तैयार नहीं हुआ है. मंत्री और अफसर अपने-अपने केबिनों में बैठने में भी परेशान हैं, क्योंकि ताले और अलमारियां सही हालत में नहीं हैं. सामान्य प्रशासन विभाग सितंबर महीने से लगातार टेंडर जारी कर रहा है, ताकि कोई ऐसा मैकेनिक मिल सके जो मंत्रियों और अधिकारियों के केबिनों के ताले और फर्नीचर की मरम्मत कर सके, लेकिन अब तक हर बार टेंडर बेनतीजा ही रहा है.

    वल्‍लभ भवन के कमरों में खराब पड़ा है समान
    वल्लभ भवन में मंत्रियों और अधिकारियों के कमरों के साथ-साथ उनके दफ्तरों में रखी टेबलें और ड्रॉअर भी खराब पड़े हुए हैं. इन सभी कामों को पूरा कराने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग कई महीनों से प्रयास कर रहा है, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिल सकी है. जनवरी महीने में एक बार फिर टेंडर जारी किया गया है और अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार कोई ऐसा मैकेनिक जरूर मिल जाएगा, जो मंत्रियों और अधिकारियों के केबिनों में टूटे हुए ताले और खराब फर्नीचर को सुधार सके.

    पहले भी निकाले गए टेंडर
    हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब किसी सरकारी काम के लिए एजेंसी या कर्मचारी नहीं मिल रहे हों. इससे पहले मंत्रियों की नेम प्लेट और कुर्सियों की मरम्मत के लिए भी कई बार टेंडर निकाले गए थे, लेकिन किसी ने रुचि नहीं दिखाई थी. हालात गर्मियों में सबसे ज्यादा खराब हो गए थे, जब मंत्रालय में लगे पानी के कूलरों में पानी भरने के लिए भी कोई निजी कंपनी आगे नहीं आई थी. इसके बाद लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई, तब जाकर मंत्रालय के कर्मचारियों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकी थी.

    4 साल से मंत्रालय और पार्किंग में पड़ा है लाखों का कबाड़ और फाइल
    मंत्रालय में पिछले चार साल से लाखों रुपये का कबाड़ पड़ा हुआ है, जिसमें सरकारी फाइलें और फर्नीचर भी शामिल हैं. मंत्रालय के भीतर से लेकर उसकी पार्किंग तक कचरे और पुराने सामान का अंबार लगा हुआ है, लेकिन कोई भी कबाड़ी इसे खरीदने के लिए तैयार नहीं है. इसकी वजह सामान्य प्रशासन विभाग की कुछ गाइडलाइन बताई जा रही हैं, जिनके चलते कोई भी कबाड़ी तय मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है. जिन कबाड़ियों या एजेंसियों को काम दिया जाता है, वे भी समय पर काम नहीं करती हैं. नतीजा यह है कि पार्किंग में फाइलों के ढेर लगे हुए हैं और जहां कर्मचारी बैठते हैं, वहां भी चारों तरफ कबाड़ और पुरानी फाइलें ही नजर आती हैं.

    सामान्‍य प्रशासन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती
    मंत्रालय के कर्मचारियों का कहना है कि मंत्रियों और अधिकारियों के सोफा सेट के कवर, तौलिए और पर्दों की धुलाई के लिए भी कोई धोबी उपलब्ध नहीं है. हालात ऐसे हो गए हैं कि मंत्रियों और अधिकारियों को अपने खर्चे पर ही साफ-सफाई करानी पड़ रही है. सामान्य प्रशासन विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि मंत्रालय के बुनियादी कामों के लिए जरूरी मैकेनिक, धोबी और कबाड़ी कैसे उपलब्ध कराए जाएं, ताकि सरकारी कामकाज सुचारु रूप से चल सके और मंत्रालय में फैली अव्यवस्था को दूर किया जा सके.

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