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    पद्मश्री सूर्य देव सिंह बारेठ का गुजरात में होगा साहित्यकार सम्मान

    खैरथल-तिजारा और अलवर जिले के गौरव पद्मश्री साहित्यकार सूर्य देव सिंह बारेठ को 22 फरवरी को गुजरात के भावनगर में अंतरराष्ट्रीय साहित्यकार सम्मान दिया जाएगा।

    मिशनसच न्यूज, किशनगढ़ बास — खैरथल-तिजारा और अलवर जिले के गौरव, प्रख्यात साहित्यकार, कवि एवं राजनेता पद्मश्री सूर्य देव सिंह बारेठ को गुजरात के भावनगर में 22 फरवरी को प्रतिष्ठित साहित्यकार सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान साहित्य जगत की प्रसिद्ध समिति द्वारा प्रदान किया जाएगा, जिसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक मुरारी बापू के करकमलों से दिया जाएगा।इस सम्मान की घोषणा से पूरे क्षेत्र में हर्ष और गौरव का वातावरण है। स्वयं पद्मश्री सूर्य देव सिंह बारेठ ने इसे अपने जीवन का अत्यंत सम्मानजनक और प्रसन्नता से भरा क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत साहित्यिक योगदान की स्वीकृति है, बल्कि पूरे अलवर और खैरथल-तिजारा जिले के लिए गर्व की बात है।

    88 वर्षों का प्रेरणादायी जीवन सफर

    साहित्यकार कवि सूर्य देव सिंह बारेठ ने अपने 88 वर्षों के जीवन में साहित्य, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक जीवन में अद्वितीय योगदान दिया है। उन्होंने विभिन्न संस्थाओं में विभिन्न पदों पर रहते हुए सैकड़ों लेखों की रचना की है। वे ढाई सौ से अधिक कवि सम्मेलनों में सहभागिता कर चुके हैं और अपनी ओजस्वी वाणी से देशभर में साहित्यिक पहचान बना चुके हैं।उन्होंने अब तक 45 से अधिक बार अलवर गौरव रत्न, प्रांतीय स्तर पर राजस्थानी रत्न तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति के हाथों पद्मश्री सम्मान प्राप्त कर गौरव हासिल किया है। विभिन्न देशों की यात्राएं कर उन्होंने अपने गांव, जिले और प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोशन किया है।

    सार्वजनिक जीवन में भी रही महत्वपूर्ण भूमिका

    साहित्य के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में भी सूर्य देव सिंह बारेठ का योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे लंबे समय तक अपनी धर्मपत्नी नंदा देवी बारेठ के साथ किशनगढ़ बास पंचायत समिति के प्रधान पद पर रह चुके हैं। ग्रामीण विकास, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक एकता के क्षेत्र में उनके कार्य आज भी क्षेत्रवासियों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि 88 वर्षों के लंबे जीवन में न तो उनके ऊपर किसी ने मुकदमा किया और न ही उन्होंने किसी पर मुकदमा किया। उन्होंने ईमानदारी, सादगी और सत्य के मार्ग पर चलते हुए गांव से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त की है।

    महाकवि दुला भाई गांधी से जुड़ा प्रेरणादायी साहित्यिक संबंध

    पत्रकारों को जानकारी देते हुए पद्मश्री बारेठ ने बताया कि वे गुजरात के महाकवि दुला भाई गांधी के समीप रहकर स्वतंत्रता आंदोलन के समय साहित्य रचना किया करते थे। आजादी के बाद महाकवि दुला भाई गांधी को पद्मश्री सम्मान मिला और उनके गांव का नाम कागघाम किया गया।महाकवि दुला भाई गांधी की स्मृति में भावनगर, गुजरात में एक साहित्यकार समिति गठित की गई है, जो उनके नाम से हर वर्ष देश-विदेश के विशिष्ट साहित्यकारों को सम्मानित करती है। इसी कड़ी में इस वर्ष पद्मश्री सूर्य देव सिंह बारेठ का चयन किया गया है।

    गांधी विचारधारा से प्रेरित जीवन दृष्टि

    सूर्य देव सिंह बारेठ ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि महात्मा गांधी सबसे पहले साउथ अफ्रीका एक महाजन की वकालत के लिए गए थे, जहां उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखी। भारत लौटकर गांधी जी ने दमनकारी कानूनों के विरुद्ध संघर्ष किया और जहां-जहां गरीबों पर अत्याचार हुआ, वहां जाकर उनके अधिकारों की रक्षा की। उन्होंने बताया कि उन्हें भी साउथ अफ्रीका में मानव धर्म पर बोलने का अवसर मिला था। वहां के लोगों के हृदय में महात्मा गांधी के प्रति गहरी श्रद्धा और आस्था है। वहां के लोग कहते हैं कि गांधी जी ने उन्हें आजादी का मार्ग दिखाया।

    क्षेत्र में खुशी की लहर

    पद्मश्री सूर्य देव सिंह बारेठ के इस सम्मान की घोषणा के बाद किशनगढ़ बास, खैरथल-तिजारा और अलवर क्षेत्र में खुशी की लहर है। साहित्य प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे पूरे जिले की उपलब्धि बताया है।

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