माघ शुक्ल पंचमी को होगा विद्या और वाणी की देवी सरस्वती का विशेष पूजन
मिशनसच न्यूज, कठूमर। विद्या, वाणी और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती का पावन पर्व बसंत पंचमी इस वर्ष 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इस कारण इसी दिन विशेष रूप से सरस्वती पूजन का विधान है।
पंडित मनोज शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी, शुक्रवार को रहेगी, अतः इसी दिन माता सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ फलदायी रहेगा।
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
दिनांक: 23 जनवरी 2026, शुक्रवार
शुभ समय: सुबह 07:13 बजे से 11:00 बजे तक
इस समयावधि में माता सरस्वती की आराधना करने से विद्या, बुद्धि और वाणी में विशेष उन्नति होती है।
सरस्वती पूजा के मंत्र
बसंत पंचमी के दिन इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना गया है—
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
या फिर सरल मंत्र— ॐ सरस्वत्यै नमः
भोग-प्रसाद
माता सरस्वती को
पुष्प, अक्षत, चंदन, केसर या अष्टगंध का तिलक अर्पित करें।
भोग में मौसमी फल, सात्विक खीर, हलवा, केसरयुक्त खीर, मिश्री, दही, पंचामृत और ड्राई फ्रूट्स अर्पित किए जा सकते हैं। धूप व कपूर से माता की आरती करना शुभ माना गया है।
बसंत पंचमी — अबूझ मुहूर्त
पंडित मनोज शर्मा ने बताया कि बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार, शिक्षा आरंभ, वाहन खरीद या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करना अत्यंत लाभकारी होता है। बिना विशेष पंचांग देखे भी इस दिन मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
विशेष नोट
हालांकि बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त है, फिर भी किसी भी विशेष कार्य से पहले अपनी राशि अनुसार चंद्रबल और कार्य विशेष के लिए उपयुक्त लग्न देखना अधिक उत्तम रहता है।
वाहन खरीद या व्यापार आरंभ के लिए चर लग्न,
जबकि गृह प्रवेश, पूजा-अनुष्ठान व विवाह के लिए स्थिर लग्न श्रेष्ठ माने गए हैं।
अतः कार्य के अनुसार उचित मुहूर्त का चयन अवश्य करें।
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