More
    Homeधर्म-समाजकौन हैं शिव के 11 रुद्र? जानिए इनके अद्भुत रूप, पूजा करने...

    कौन हैं शिव के 11 रुद्र? जानिए इनके अद्भुत रूप, पूजा करने से पूरी होती है सभी मनोकामना!

    भगवान शिव के 11 रुद्र (11 Rudras) अवतारों की कहानी बहुत दिलचस्प और रहस्यमय है। पुराणों के अनुसार, जब भी सृष्टि पर कोई संकट आया या अधर्म फैला, तो भगवान शिव ने अपने ही अंश से इन बारह रुद्रों को प्रकट किया। शिव पुराण के अनुसार, रुद्रों की उत्पत्ति ऋषि कश्यप की पत्नी सुरभि के गर्भ से हुई थी, जबकि कुछ परंपराएं उनकी उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के क्रोध से मानती हैं. यहां भगवान शिव के इन शक्तिशाली 11 रुद्र अवतारों के नाम और महत्व का वर्णन दिया गया है…

    भगवान शिव के 11 रुद्रों के नाम-
    1. कपाली: ये पहले रुद्र हैं, जो शत्रुओं का नाश करने वाले और बाधाओं को दूर करने वाले माने जाते हैं.

    2. पिंगल: इनका रूप अग्नि के समान तेजस्वी है। ये भक्तों के दुखों को जलाकर नष्ट कर देते हैं.

    3. भीम: भीम रुद्र का स्वरूप अत्यंत विशाल और शक्तिशाली है। ये अन्याय के विरुद्ध न्याय की स्थापना करते हैं.

    4. विरुपाक्ष: तीन नेत्रों वाले विरुपाक्ष रुद्र ज्ञान और अंतर्दृष्टि के स्वामी हैं.
    5. विलोहित: इनका नाम इनके लाल रंग के कारण पड़ा। ये अग्नि और जीवन की ऊर्जा के प्रतीक हैं.
    6. शास्ता: ये अनुशासन और धर्म के रक्षक हैं। इन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप माना जाता है.
    7. अजपाद: ये आध्यात्मिक शांति और मोक्ष प्रदान करने वाले रुद्र हैं.
    8. अहिर्बुध्न्य: ये गहरे ज्ञान और कुण्डलिनी शक्ति के स्वामी माने जाते हैं.
    9. शम्भु: सुख और कल्याण प्रदान करने वाले महादेव के इस रूप को शम्भु कहा जाता है.
    10. चण्ड: अधर्मियों और राक्षसों के संहार के लिए भगवान ने यह भयानक रूप धारण किया था.
    11. भव: यह रुद्र अवतार सृष्टि के सृजन और निरंतरता का प्रतीक है.
    11 रुद्रों की उत्पत्ति की कथा-
    शिवपुराण के अनुसार, एक समय जब असुरों ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब ऋषि कश्यप ने भगवान शिव की कठिन तपस्या की. शिव जी ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि वे उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे. इसके बाद कश्यप की पत्नी सुरभि के गर्भ से ग्यारह पुत्रों का जन्म हुआ, जो 11 रुद्र कहलाए. इन रुद्रों ने न केवल देवताओं की रक्षा की, बल्कि ब्रह्मांड के संतुलन को भी बनाए रखा.
    पूजा का फल और महत्व-
    -ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष या शनि की साढ़ेसाती का बुरा प्रभाव हो, तो उसे ‘एकादश रुद्र’ (11 रुद्रों) की आराधना करनी चाहिए.
    -रुद्राभिषेक: सावन के महीने या महाशिवरात्रि (2026 में 15 फरवरी) के दिन ग्यारह रुद्रों के नाम से अभिषेक करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है.
    -हनुमान जी: यह भी माना जाता है कि हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र के ही अवतार हैं, जो कलयुग में भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं.

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here