वन मंत्री संजय शर्मा का विधानसभा में बयान – मानव-वन्यजीव संघर्ष में मुआवजा 10 लाख करने की तैयारी , सीटीएच निर्धारण सुप्रीम कोर्ट निर्देशों के अनुसार
मिशनसच न्यूज, जयपुर। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा ने मंगलवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि करौली टाइगर रिजर्व सेंचुरी के अंतर्गत आने वाले गांवों के निवासियों को उनकी सहमति के बिना विस्थापित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीणों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील है और किसी भी प्रकार का विस्थापन स्वैच्छिक प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा।
मंत्री ने बताया कि रिजर्व क्षेत्र की बंजर भूमि पर यदि कोई ग्रामवासी खेती कर रहा है, तो विभागीय नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में मुआवजे का प्रावधान नहीं है। हालांकि सरकार मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए गंभीर है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में जारी आदेश के तहत मानव-वन्यजीव संघर्ष में मृत्यु होने पर परिजनों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस राशि को दोगुना करने का निर्णय लिया है। नियमों में संशोधन के बाद ऐसी घटनाओं में मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
प्रश्नकाल के दौरान सदस्य जसवंत सिंह गुर्जर द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए शर्मा ने बताया कि धौलपुर-करौली क्षेत्र में क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (सीटीएच) का निर्धारण सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। समिति की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने के बाद ही यह प्रक्रिया पूरी की गई।
उन्होंने सरिस्का टाइगर रिजर्व का उल्लेख करते हुए बताया कि हाल ही में दो बाघिनों के बीच हुए संघर्ष में एक बाघिन की मृत्यु हो गई थी। विभाग द्वारा नियमानुसार पोस्टमार्टम कर सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि वर्तमान में धौलपुर-करौली क्षेत्र के सीटीएच में आने वाले गांवों के लिए स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई है। भविष्य में यदि विस्थापन की आवश्यकता हुई तो राज्य सरकार एवं नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही मुआवजा एवं पुनर्वास की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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