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    एमबीसी सशक्तिकरण से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा राजस्थान

    भजनलाल सरकार की एमबीसी को छात्रवृत्ति, छात्रावास, कोचिंग और कौशल योजनाओं से हजारों विद्यार्थियों व युवाओं को मिला संबल

    मिशनसच न्यूज, जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील, दूरदर्शी और कुशल नेतृत्व में प्रदेश का अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की मजबूत राह पर अग्रसर है। राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और प्रभावी नीतियों के चलते हजारों परिवार विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। शिक्षा, रोजगार, आर्थिक संबल और सामाजिक सम्मान के माध्यम से एमबीसी वर्ग के सशक्तीकरण को नए आयाम मिल रहे हैं।

    अति पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक उत्थान के लिए देवनारायण योजना के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों पर वर्ष 2025 में 248 करोड़ रुपए से अधिक की राशि व्यय की जा चुकी है। उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 11 से उच्च शिक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए इस वित्तीय वर्ष में 102.42 करोड़ रुपए से अधिक व्यय कर 37 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है। वहीं पूर्व मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (कक्षा 6 से 10) में 7.10 करोड़ रुपए खर्च कर 69 हजार से अधिक विद्यार्थियों को सहायता प्रदान की गई है।

    देवनारायण गुरुकुल योजना के माध्यम से प्रतिभावान विद्यार्थियों को निजी प्रतिष्ठित विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रतिवर्ष 500 विद्यार्थियों के प्रवेश के प्रावधान वाली इस योजना में चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। देवनारायण छात्रावास योजना के तहत स्वीकृत छात्रावासों में 3750 विद्यार्थी तथा देवनारायण आवासीय विद्यालय योजना के अंतर्गत 5 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।

    बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल भी की गई है। एमबीसी छात्राओं के लिए करौली के नादौती एवं भरतपुर के बयाना में छात्रा महाविद्यालय मय हॉस्टल स्थापित किए गए हैं। नादौती कॉलेज में 74.80 लाख रुपए व्यय कर 177 छात्राओं को लाभ मिला है, जबकि बयाना कॉलेज में 155.29 लाख रुपए खर्च कर 543 छात्राओं को उच्च शिक्षा का अवसर प्रदान किया गया है।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को आईएएस, आरएएस, क्लैट, नीट, रीट जैसी परीक्षाओं की कोचिंग दी जा रही है। इस योजना पर 4 करोड़ रुपए व्यय कर विद्यार्थियों को भविष्य निर्माण का सशक्त मंच उपलब्ध कराया गया है।

    कौशल विकास की दिशा में भी देवनारायण योजना के अंतर्गत 6 आईटीआई संस्थानों में 365 लाख रुपए व्यय कर 500 से अधिक युवाओं को तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

    मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में एमबीसी वर्ग का सशक्तीकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की जीवंत मिसाल बन चुका है।

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