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    अंबेडकर विवाद पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, आपराधिक अवमानना दायर करने एजी ऑफिस की अनुमति आवश्यक

    जबलपुर : अंबेडकर विवाद में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद रिहा हुए ग्वालियर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा से संबंधित मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. उनकी रिहाई के बाद उनका सम्मान किए जाने पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई किए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में इंटर विनर की ओर से आवेदन दायर किया गया था. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की ओर से सुनवाई के दौरान पाया गया कि आवेदन दायर करने के संबंध में महाधिवक्ता कार्यालय से अनुमति नहीं ली गई है.

     

    क्या है अंबेडकर विवाद और आपराधिक अवमानना?

    नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के परिसर में डॉ. आंबेडकर की मूर्ति स्थापित करने के सिलसिले में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान इंटर विनर की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया था कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, ग्वालियर के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा को डॉ. आंबेडकर की फोटो फाड़ने के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था. बाद में इस गिरफ्तारी को गलत माना गया और उन्हें व उनके साथियों को जमानत मिल गई थी. इसके बाद आरोप लगाए गए कि जबलपुर हाईकोर्ट परिसर में उनके साथियों द्वारा अधिवक्ता रूप सिंह मरावी से मारपीट की गई.

     

    एडवोकेट से मारपीट के भी आरोप

    आरोप लगाए गए कि पीड़ित अधिवक्ता की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है, सिर्फ लिखित आवेदन लिया है. इस पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने हाईकोर्ट परिसर में कथित तौर पर अधिवक्ता के साथ हुई मारपीट की घटना की जांच प्रशासनिक स्तर पर करवाए जाने के निर्देश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को दिए. युगलपीठ ने घटना के सीसीटीव्ही फुटेज सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए हैं.

     

    महाधिवक्ता कार्यालय की अनुमति आवश्यक

    वहीं, ग्वालियर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिम मिश्रा से संबंधित मामले में युगलपीठ ने आवेदन वापस लेने के आग्रह को स्वीकार करते हुए आवेदक को विधि अनुसार कार्यवाही की स्वतंत्रता प्रदान की है. हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक अवमानना दायर करने के लिए महाधिवक्ता कार्यालय की अनुमति आवश्यक है. याचिका पर अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित की गई है.

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