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    Homeराज्यमध्यप्रदेशबागेश्वर धाम में 305 जोड़ों का सामूहिक विवाह, साधु-संतों का आशीर्वाद

    बागेश्वर धाम में 305 जोड़ों का सामूहिक विवाह, साधु-संतों का आशीर्वाद

    महाशिवरात्रि पर बागेश्वर धाम में अंतरराष्ट्रीय कन्या विवाह महोत्सव, 8 देशों के राजदूत बने साक्षी

    छतरपुर। बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 305 जोड़ों का भव्य सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। इस अंतरराष्ट्रीय कन्या विवाह महोत्सव में एक नेपाली जोड़ा भी शामिल रहा, जिसके साथ नेपाल से आए 50 बाराती भी समारोह के साक्षी बने।

    आयोजन में प्रत्येक जोड़े को लगभग 3 लाख रुपये का गृहस्थी सामान उपहार स्वरूप दिया गया, साथ ही 30 हजार रुपये की फिक्स डिपॉजिट (एफडी) भी प्रदान की गई। विवाह समारोह में साधु-संतों, जनप्रतिनिधियों और देश-विदेश की हस्तियों ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया।

    संतों का आशीर्वाद और विशेष संदेश

    कथा वाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 305 गरीब कन्याओं के ‘पिता’ बनकर उनके हाथ पीले कराए। वृंदावन धाम से आए गोरीगोपाल आश्रम के प्रमुख अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि जो समाज को जोड़ता है, वही समाज को ऊपर उठाता है।

    जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी समारोह में संदेश देते हुए कहा कि वे आगामी एकांतवास के बाद संभवतः अगले वर्ष धीरेंद्र शास्त्री के विवाह में शामिल होने आएंगे।

    मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला सपरिवार समारोह में पहुंचे और नवविवाहित जोड़ों को सुखमय जीवन का आशीर्वाद दिया।

    8 देशों के राजदूत रहे मौजूद

    इस महोत्सव में चिली, पेरू, उरुग्वे, इक्वाडोर, पनामा, पराग्वे, सूरीनाम और अल साल्वाडोर सहित 8 देशों के राजदूत शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों का खजुराहो एयरपोर्ट पर पारंपरिक स्वागत किया गया। समारोह के दौरान राजदूतों और बाबा बागेश्वर को एक साथ उत्सव में थिरकते हुए भी देखा गया।

    नेपाल से आया विशेष जोड़ा

    सामूहिक विवाह में नेपाल से आए जोड़े के कारण भारतीय और नेपाली दोनों परंपराओं के अनुसार विवाह संस्कार संपन्न हुए। नेपाल से आए 50 बाराती इस ऐतिहासिक आयोजन के गवाह बने।

    नागपुर से मंगाई गई रसमलाई

    7वें कन्या विवाह महोत्सव के अवसर पर दामादों के स्वागत के लिए नागपुर से विशेष रसमलाई मंगाई गई। आयोजन स्थल पर एक विशेष दर्शन दीर्घा भी बनाई गई, जिसमें बागेश्वर महाराज के जीवन, तप और संकल्प की झलक प्रस्तुत की गई।इस आयोजन को सामाजिक समरसता और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता का अनूठा उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें धर्म, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय देखने को मिला।

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