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    टीकाराम जूली ने निभाया पिता और जनसेवक का फर्ज एक साथ,भिवाड़ी अग्निकांड पर सदन में उठाई आवाज

    बेटी की विदाई के तुरंत बाद भिवाड़ी अग्निकांड पर सदन में उठाई आवाज

    जयपुर, । निजी जीवन की सबसे भावुक घड़ियों के बीच भी जनसेवा को सर्वोपरि रखने की मिसाल सोमवार को राजस्थान विधानसभा में देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बेटी की विदाई के तुरंत बाद सदन में पहुंचकर भिवाड़ी में हुए भीषण अग्निकांड का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

    रविवार रात को उनकी सुपुत्री वर्षा का विवाह संपन्न हुआ था और सोमवार को विदाई का कार्यक्रम था। एक पिता के रूप में भावनात्मक क्षणों के बीच भी उन्होंने संवैधानिक दायित्व को प्राथमिकता देते हुए सीधे विधानसभा पहुंचकर जनहित का प्रश्न उठाया।

    भिवाड़ी अग्निकांड पर गहरी संवेदना

    सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जूली ने ‘पॉइंट ऑफ इंफॉर्मेशन’ के माध्यम से भिवाड़ी की फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड का मामला उठाया। इस हादसे में सात लोगों की दर्दनाक मृत्यु पर उन्होंने गहरा शोक व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि यह दुर्घटना प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम प्रतीत होती है। मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए उन्होंने इसे अत्यंत दुखद और चिंताजनक बताया।

    सरकार से की स्पष्ट मांग

    नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि:

    • मृतकों के परिजनों को तत्काल और पर्याप्त आर्थिक मुआवजा दिया जाए।

    • घायलों को उच्चस्तरीय और निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

    • हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित प्रबंधन की जवाबदेही तय की जाए।

    • भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए औद्योगिक इकाइयों की सख्त जांच की जाए।

    उन्होंने कहा कि केवल संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई आवश्यक है।

    निजी दायित्वों से ऊपर जनहित

    विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि जूली ने न केवल सदन में मुद्दा उठाया, बल्कि स्पीकर के चैंबर में आयोजित कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक में भी भाग लिया।

    उन्होंने अपने संबोधन में कहा,

    “बेटी को विदा करना हर पिता के लिए जीवन का सबसे भावुक क्षण होता है, लेकिन एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरा पहला धर्म उन परिवारों के साथ खड़ा होना है जिन्होंने इस अग्निकांड में अपने अपनों को खोया है। पीड़ितों को न्याय दिलाना ही मेरी प्राथमिकता है।”

    जनप्रतिनिधित्व की संवेदनशील मिसाल

    राजनीतिक हलकों में जूली के इस कदम को जनप्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की मिसाल माना जा रहा है। निजी सुख-दुख से ऊपर उठकर जनता की पीड़ा को प्राथमिकता देना लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    भिवाड़ी अग्निकांड की गूंज अब विधानसभा में भी सुनाई दे रही है और विपक्ष की ओर से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।

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