चंडीगढ़ में अणुव्रत स्थापना दिवस कार्यक्रम, सांप्रदायिक सौहार्द और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
चंडीगढ़। अणुव्रत आंदोलन का शुभारंभ 1 मार्च 1949 को आचार्य तुलसी द्वारा राजस्थान के सरदारशहर कस्बे में किया गया था। उस समय देश सांप्रदायिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा था। ऐसे माहौल में अणुव्रत आंदोलन ने सभी धर्मों और सम्प्रदायों के प्रमुख लोगों को एक मंच पर लाकर यह संदेश दिया कि धर्म के मूल सिद्धांत एक हैं और मानवता सर्वोपरि है।
1 मार्च को अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर सेक्टर 24सी स्थित अणुव्रत भवन के तुलसी सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनीषीसंत मुनि विनयकुमार आलोक ने कहा कि अणुव्रत समिति समाज में फैल रही समस्याओं के समाधान हेतु सिद्धांत आधारित कार्य करती है। समाधान वही श्रेष्ठ है जो नई समस्याओं को जन्म न दे और हिंसा को अनावश्यक सिद्ध कर दे।
उन्होंने कहा कि अणुव्रत ने नशा मुक्ति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है। एक वर्ष में करोड़ों लोगों को नशामुक्त करना आसान नहीं, लेकिन अणुव्रत कार्यकर्ताओं ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। अणुव्रत का लक्ष्य नशामुक्त समाज का निर्माण है और समाज उसी दिशा में अग्रसर है।
इस अवसर पर अतुल मुनि जी ने कहा कि अणुव्रत नैतिक जागरण का आंदोलन है। ‘अणु’ का अर्थ है छोटा और ‘व्रत’ का अर्थ है संकल्प। यदि व्यक्ति छोटा-सा संकल्प लेकर उसे निष्ठा से निभाए, तो वह स्वयं के साथ-साथ परिवार और समाज का जीवन भी बदल सकता है। लाखों लोगों ने अणुव्रत आंदोलन से प्रेरित होकर हिंसा, मद्यपान, मांसाहार, झूठ और छल-कपट जैसी बुराइयों का त्याग किया।
कार्यक्रम में अणुव्रत समिति के अध्यक्ष डॉ. सलील जैन, महामंत्री प्रदीप जैन, कोषाध्यक्ष सतीश जैन, वेद प्रकाश जैन, सुधीर जैन, नरेश गर्ग सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने अणुव्रत के सिद्धांतों को अपनाने का आह्वान किया।
अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर अणुव्रत भवन के बाहर लंगर भी लगाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में राहगीरों ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही इको-फ्रेंडली होली के तहत जल संरक्षण, रासायनिक रंगों से बचाव और प्राकृतिक रंगों के उपयोग के लिए जागरूक किया गया।
डॉ. सलील जैन ने कहा कि पर्यावरण अनुकूल ‘गुलाल’ से होली खेलने से जल संकट का खतरा कम होता है। सूखे और प्राकृतिक रंगों का उपयोग जल संसाधनों के संरक्षण में सहायक है। उन्होंने बच्चों को ऐसे स्थानों पर होली खेलने की सलाह दी, जहां पानी जमीन में समा सके या पौधों द्वारा सोखा जा सके, जिससे पर्यावरण को नुकसान कम हो।
अणुव्रत आंदोलन का उद्देश्य जाति, वर्ण, वर्ग, भाषा और प्रांत की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर मानव जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है। यही असांप्रदायिक मानव धर्म ‘अणुव्रत’ की मूल भावना है।
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