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    खाटूश्याम जी के दरबार में दिखा अनोखा नजारा, पहली बार पंचमेवों से हुआ श्रृंगार, दूर-दूर से पहुंचे भक्त

    ब्लू सिटी जोधपुर के 14 सेक्टर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित मंछापूर्ण महादेव श्री श्याम मंदिर में द्वादशी के पावन अवसर पर इस बार कुछ खास देखने को मिला. चार साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में खाटू श्याम बाबा का 51 किलो पंचमेवों से भव्य और अनोखा श्रृंगार किया गया. मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और खाटू श्याम बाबा की जय के जयकारों से पूरा मंदिर गूंज उठा. आमतौर पर बाबा का श्रृंगार फूलों से किया जाता है, लेकिन इस बार बादाम, काजू और अखरोट जैसे सूखे मेवों से दरबार सजाया गया.

    पंचमेवों से बनाई गई कलात्मक आकृतियां और सजावट देखने लायक रही. विशेष बात यह रही कि इस अनोखे श्रृंगार की तैयारी के लिए सेवाभावी कार्यकर्ता करीब दो दिन तक दिन-रात जुटे रहे. बड़ी सावधानी और श्रद्धा के साथ एक-एक मेवे को सजाकर दरबार को भव्य रूप दिया गया. द्वादशी के दिन बाबा के मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे. मंदिर समिति के सदस्यों ने दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा, जिससे सभी भक्तों को सहज और शांतिपूर्ण तरीके से बाबा के दर्शन हो सके.
    श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह

    द्वादशी के दिन सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गई. परिवार सहित पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण किया और विशेष श्रृंगार की सराहना की. मंदिर समिति और सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था संभाली, जिससे पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय और शांतिपूर्ण माहौल बना रहा.

     हर ग्यारस पर होता है विशेष श्रृंगार
    जोधपुर के इस खाटू श्याम मंदिर में केवल इस अवसर पर ही नहीं, बल्कि हर ग्यारस को बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है. कभी विदेश से मंगाए गए फूलों से तो कभी अलग-अलग किस्म के आकर्षक फूलों से दरबार सजाया जाता है. हालांकि पंचमेवों से 51 किलो का यह श्रृंगार पहली बार किया गया, जिसने भक्तों के बीच अलग ही उत्साह और चर्चा का माहौल बना दिया. मंदिर पहुंचे एक श्रद्धालु कैलाश ने बताया कि हम हर ग्यारस को बाबा के दर्शन करने आते हैं, लेकिन आज का श्रृंगार सच में अद्भुत है. 51 किलो पंचमेवों से सजा दरबार हमने पहली बार देखा है. दो दिन की मेहनत साफ नजर आ रही है. बाबा के दरबार में आकर मन को शांति मिलती है और ऐसा लगता है जैसे सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो.

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