नीलगाय मुद्दे पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने केंद्र सरकार से मांगी विस्तृत जानकारी
अलवर। बहुचर्चित और विवादास्पद नीलगाय हत्या कानून को लेकर प्रदेश में लगातार विरोध के स्वर उठ रहे हैं। जहां एक ओर इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जांच रिपोर्ट तलब की है।
बताया जा रहा है कि यह मामला उस समय राज्यपाल के संज्ञान में आया जब राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन से जुड़े ओमप्रकाश गुप्ता ने उन्हें इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। पिछले वर्ष अलवर में मत्स्य विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के आगमन के दौरान यह ज्ञापन दिया गया था। इसके अतिरिक्त राज्यपाल के जयपुर स्थित सरकारी आवास राजभवन पर भी रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पत्र भेजा गया था।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, ज्ञापन पर संज्ञान लेने के बाद भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त निदेशक (वन्यजीव) सुनील शर्मा ने अपने पत्र क्रमांक डब्ल्यूएल-8/160/2025 के माध्यम से राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को इस मामले की जांच कर आवश्यक और उपयुक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
इसके बाद राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने भी संबंधित वन अधिकारियों से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
हालांकि इस पूरे मामले में राज्य सरकार की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार नीलगाय हत्या कानून को लेकर कई सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरण संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव तथा राज्य वन मंत्री संजय शर्मा को लगभग पचास से अधिक ज्ञापन भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इधर, प्रदेश के कई धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरण संगठनों ने इस कानून के खिलाफ अपना विरोध लगातार जारी रखा हुआ है। अलवर और जयपुर सहित कई स्थानों से श्रद्धालुओं ने खाटू धाम में पदयात्रा कर भगवान से नीलगायों के जीवन की रक्षा के लिए प्रार्थना भी की है।
वहीं आर्य समाज, कांग्रेस पर्यावरण प्रकोष्ठ, श्री श्याम भक्त मंडल सहित कई संगठनों ने यज्ञ-हवन कर सामूहिक रूप से भगवान से नीलगायों को जीवनदान देने की प्रार्थना की है।
अब राज्यपाल द्वारा इस मामले में संज्ञान लेकर जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना पड़ सकता है।
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