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    भर्तृहरि धाम की आस्था और वैराग्य की अनोखी कहानी

    अलवर की अरावली में स्थित भर्तृहरि धाम में लगता है विशाल मेला, अमर गंगा स्नान और ज्योत जलाने की विशेष मान्यता

    थानागाजी। राजस्थान के अलवर जिले की अरावली पर्वतमाला में स्थित भर्तृहरि धाम आस्था, इतिहास और वैराग्य का अद्भुत संगम माना जाता है। यहां महाराजा भर्तृहरि की तपस्थली और समाधि होने के कारण यह स्थान देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

    महाराजा भर्तृहरि उज्जैन के राजा थे और महान कवि, नीतिकार तथा योगी के रूप में प्रसिद्ध थे। उनके जीवन की कहानी बेहद रोचक और प्रेरणादायक मानी जाती है। कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ से प्राप्त एक चमत्कारी फल उन्होंने अपनी पत्नी पिंगला को दिया था, लेकिन रानी ने वह फल अपने प्रेमी कोतवाल को दे दिया। जब यह बात राजा भर्तृहरि को पता चली तो वे गहरे वैराग्य में डूब गए।

    इस घटना के बाद उन्होंने अपना संपूर्ण राज्य अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को सौंप दिया और सांसारिक जीवन त्यागकर तपस्या के मार्ग पर चल पड़े। उन्होंने वर्षों तक साधना की और योगी बन गए। माना जाता है कि उनकी समाधि अलवर जिले के अरावली क्षेत्र में स्थित भर्तृहरि धाम में है, जिसे आज भी श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा से पूजते हैं।

    भर्तृहरि मेले में उमड़ती है आस्था

    भर्तृहरि धाम में प्रतिवर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को विशाल मेला भरता है। इस मेले में अलवर, जयपुर, दौसा, बांदीकुई, मालाखेड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों के अलावा देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    मेले के दौरान भंडारे, प्याऊ और विभिन्न प्रकार की दुकानों का आयोजन होता है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सवामनी और भोग प्रसादी चढ़ाते हैं तथा बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

    मेले के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए जाते हैं। पुलिस बल, उड़न दस्ता और अस्थायी पुलिस चौकियां तैनात की जाती हैं। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिसकर्मियों की भी नियुक्ति की जाती है।

    इसके अलावा मेले में सीसीटीवी कैमरों और अन्य आधुनिक उपकरणों की सहायता से निगरानी रखी जाती है। रोडवेज विभाग भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष बसों का संचालन करता है।

    ज्योत और अमर गंगा का महत्व

    भर्तृहरि धाम में बाबा की ज्योत जलाने की विशेष धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से ज्योत जलाने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है तथा भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।

    धाम में स्थित अमर गंगा भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। मान्यता है कि भर्तृहरि बाबा ने अपने चिमटे से धरती पर प्रहार किया, जिससे यहां अमर गंगा प्रकट हुई। इस पवित्र जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    इसी आस्था और विश्वास के कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भर्तृहरि धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

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