भोपाल: राजधानी भोपाल में पारिवारिक रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है. जिसमें एक महिला ने अपने पति पर अपनी ही सगी बहन के साथ अवैध संबंध होने का गंभीर आरोप लगाया है. पीड़िता का कहना है कि, जब उसने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. अब इस मामले की शिकायत पीड़िता ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया नहाटकर से करते हुए न्याय की गुहार लगाई है.
संबंध की जानकारी मिलने पर पत्नी से मारपीट
पीड़ित महिला ने बताया कि, ''उसकी शादी फरवरी 2025 में हुई थी, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उसे अपने पति के व्यवहार पर शक होने लगा.'' महिला का आरोप है कि, ''उसके पति के अपनी ही सगी बहन के साथ अनुचित संबंध हैं. पीड़िता के अनुसार, एक दिन उसने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. जब उसने इस बात का विरोध किया, तो उसके पति ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी.
ससुर ने कहा बेटे नहीं अपने लिए की शादी
महिला का कहना है कि, पिछले 5-6 महीनों से उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसके कारण वह पिछले पांच महीनों से अपनी मां के घर रह रही है. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि, ''जब उसने इस बारे में अपने ससुर से शिकायत की, तो उन्हें भी इस संबंध की जानकारी थी.'' पीड़िता के अनुसार ससुर ने उसे चौंकाने वाला जवाब देते हुए कहा कि, ''हमने शादी अपने लिए की है, उसके लिए नहीं. तुम हमारे साथ रहो, जो चाहिए हमसे मांगो.'' महिला का आरोप है कि उसकी सास भी पति और परिवार का ही पक्ष ले रही हैं.
पीड़िता ने महिला आयोग से की निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़िता ने बताया कि, ''उसका पति भोपाल के पीरगेट स्थित एक बिल्डिंग में रहता है और एमपी नगर इलाके में उसकी दुकान है. उसकी ननद अक्सर अपने कमरे में ताला लगाकर रहती थी, जिससे उसे पहले ही शक होने लगा था.'' अब पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष से करते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है.
एमपी के 800 मामले पहुंचे महिला आयोग
बुधवार को राजधानी के महारानी लक्ष्मी बाई पॉलिटेक्निक कालेज में महिला संबंधित अपराधों को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया नाहटकर सुनवाई कर रही थी. इस दौरान उनके साथ कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और पुलिस आयुक्त संजय कुमार भी उपस्थित रहे. मीडिया से बात करते हुए विजया रहाटकर ने बताया कि, ''आज लगभग 50 मामलों की सुनवाई की गई. इस साल अब तक पूरे मध्य प्रदेश में लगभग 800 मामले सामने आए हैं.''
गंभीर मामलों में पुलिस से मांगते हैं एक्शन टेकन रिपोर्ट
विजया नहाटकर ने बताया कि, ''कई मामलों का समाधान परिवारों के बीच काउंसलिंग और मध्यस्थता के जरिए किया जाता है. कुछ मामले एक बार में सुलझ जाते हैं, तो कुछ में 3-4 मुलाकातों की जरूरत होती है.'' उन्होंने आगे कहा कि, ''आयोग का लक्ष्य तीन महीने के भीतर मामलों को सुलझाना है. गंभीर मामलों में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और जांच करने के निर्देश दिए जाते हैं. आयोग ने पुलिस से 7, 15 या 30 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है.''


