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    एकेडमी अवॉर्ड को क्यों कहा जाता है ऑस्कर? जानें इसके नाम की दिलचस्प कहानी

    फिल्मी दुनिया के सबसे प्रमुख अवॉर्ड ऑस्कर के बारे में तो हर कोई जानता है। हर कलाकार का सपना होता है कि वो द गोल्डन बॉय ट्रॉफी को अपने नाम कर सके। लेकिन क्या आप ऑस्कर की ट्रॉफी के बारे में जानते हैं? कहां से आया इसका आइडिया, किस चीज की बनी होती है ट्रॉफी और किसके नाम पर है ऑस्कर? यहां जानिए ऑस्कर की ट्रॉफी के बारे में सबकुछ। 

    कहां से आया अकादमी अवॉर्ड का आइडिया

    ऑस्कर ट्रॉफी का विचार और डिजाइन 1927 में एक मीटिंग के दौरान सामने आया था। एमजीएम स्टूडियो के मालिक लुईस बी मेयर ने सबसे पहले इसके बारे में सोचा था। उनके दिमाग में आया कि क्यों न एक ग्रुप बनाया जाए, जिसमें पूरी फिल्म इंडस्ट्री को फायदा मिल सके।इसपर उन्होंने अपने साथ काम करने वाले और दोस्तों को बुलाकर एक मीटिंग की जिसमें डायरेक्टर फ्रैड निबलो, फिल्ममेकर फीड बिटसोन और एक्टर कॉनरेड नागेल शामिल हुए। उन लोगों को ये आइडिया पसंद आया और बाद में एक होटल में हॉलीवुड के 36 टॉप पर्सनैलिटी को बुलाया गया था। सबके सामने ये आडिया रखते हुए 'अकादमी पुरस्कार' नाम बताया गया, जिसे सभी ने पसंद किया।

    कैसे तय हुई ट्रॉफी और क्या है इसका अर्थ?

    जब ये सोचा गया कि सम्मान पाने वाले को दिया क्या जाएगा, तब ये तय हुआ कि एक ट्रॉफी दी जाए, जिसे अलग तरह का डिजाइन करना होगा। इसकी जिम्मेदारी एमजीएम स्टूडियो के आर्ट डायरेक्टर केड्रिक गिबोन्स को दी गई।गिबन्स ने एक नाइट (शूरवीर) का स्केच बनाया, जो एक फिल्म रील पर खड़ा है और उसने अपने हाथों में एक तलवार थामी हुई है। रील में पांच तीलियां होती हैं, जो एकेडमी की मूल पांच शाखाओं को दर्शाती हैं।अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, तकनीशियन और लेखक। हाथ में पकड़ी हुई तलवार फिल्म इंडस्ट्री की प्रगति और कल्याण की रक्षा का प्रतीक है। गिबन्स के स्केच को वास्तविक मूर्ति का रूप लॉस एंजिल्स के मूर्तिकार जॉर्ज स्टेनली ने दिया था। उन्होंने इस डिजाइन को और अधिक स्लीक और आधुनिक बनाया, जो आज भी लगभग वैसा ही है।

    मैक्सिकन अभिनेता ने ट्रॉफी के लिए दिया न्यूड पोज

    कई रिपोर्ट्स के मुताबाकि, ऐसा कहा जाता है कि मैक्सिकन अभिनेता और फिल्म निर्माता एमिलियो ‘एल इंडियो’ फर्नांडिस ने इस ट्रॉफी के लिए मॉडल के रूप में बिना कपड़ों के पोज दिया था। हालांकि, एकेडमी ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है।

    कैसे पड़ा ऑस्कर नाम?

    इस ट्रॉफी का आधिकारिक नाम ‘एकेडमी अवार्ड ऑफ मेरिट’ है। कहा जाता है कि एकेडमी की लाइब्रेरियन मार्गरेट हेरिक ने पहली बार इसे देखकर कहा था कि यह उनके अंकल ऑस्कर की तरह दिखती है, जिसके बाद ही इसका नाम ऑस्कर पड़ा और अब इसी नाम से यह ट्रॉफी ज्यादा प्रसिद्ध है।

    कैसे तैयार की गई ट्रॉफी?

    ऑस्कर की ट्रॉफी 13 इंच लंबी और 8.85 किलो की बनाई गई थी। इसमें 92.5 प्रतिशत टिन, 7.5 प्रतिशत तांबा लगाया गया और आखिर में सोने की परत चढ़ाई गई। एक ऑस्कर ट्रॉफी को बनाने में 400 डॉलर यानी लगभग 33 हजार 77 रुपये का खर्चा आया। आज यह ट्रॉफी तांबे की बनी होती है और इस पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी होती है।

    कब हुआ पहला ऑस्कर अवॉर्ड इवेंट?

    16 मई 1929 को पहला अकादमी पुरस्कार आयोजित हुआ। इसमें करीब 270 हॉलीवुड सेलिब्रिटीज शामिल हुए। इन सभी सेलेब्स को हॉलीवुड रूजवेल्ट होटल के ब्लॉसम रूम में आने के लिए इनविटेशन भेजा गया। यहीं पर पहला ऑस्कर इवेंट हुआ, जिसमें कोई दर्शक नहीं थे और ये फंक्शन महज 15 मिनट में खत्म हो गया था। ये इवेंट पेड था जिसमें 5 डॉलर का एक टिकट बेचा गया था।

    एक कुत्ते को मिली थी ऑस्कर की पहली दावेदारी

    कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला ऑस्कर जर्मन एक्टर एमिल जेनिंग्स ने जीता था। हालांकि, इस अवॉर्ड का पहला दावेदार एक कुत्ता था। जर्मन शेफर्ड डॉग, जिसका नाम टिन टिन बताया गया था।उसने हॉलीवुड की करीब 27 फिल्मों में काम किया, जिसमें से 4 फिल्में साल 1929 में ही रिलीज हो चुकी थीं। इनमें से दो फिल्मों उस डॉग ने बेहतरीन काम भी किया था। इसलिए अवॉर्ड कमेटी ने उसे पहला ऑस्कर मिलने का हकदार माना था।लेकिन अकादमी पुरस्कार के पहले प्रेसिडेंट फेयरबैंक्स ने सोचा कि पहला अवॉर्ड किसी डॉग को जाने से एक गलत संदेश जा सकता है। इसलिए कमेटी ने उस डॉग और जर्मन एक्टर एमिल जेनिंग्स को लेकर वोट किए, जिसमें सबसे ज्यादा वोट्स एमिल को मिले।

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