More
    Homeराजस्थानखैरथलखैरथल जिला मुख्यालय विवाद के बीच किशनगढ़ बास की उम्मीदें तेज

    खैरथल जिला मुख्यालय विवाद के बीच किशनगढ़ बास की उम्मीदें तेज

    खैरथल में प्रशासनिक पद खाली, किशनगढ़ बास में न्यायालय संचालन से मुख्यालय की चर्चा

    किशनगढ़ बास। खैरथल-तिजारा जिले के नाम और मुख्यालय को लेकर करीब छह माह से बनी असमंजस की स्थिति के बीच अब जिले के सबसे पुराने प्रशासनिक एवं न्यायिक केंद्र रहे किशनगढ़ बास उपखंड के दिन फिर से लौटने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार पिछले तीन माह से खैरथल में जिला कलेक्टर की स्थायी नियुक्ति नहीं की गई है और अलवर कलेक्टर के पास अतिरिक्त कार्यभार है। वहीं हाल ही में खैरथल एसपी के तबादले के बाद भिवाड़ी एसपी को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। दूसरी ओर किशनगढ़ बास में खैरथल जिला न्यायालय की सभी अदालतों का वैकल्पिक रूप से संचालन होना मुख्यालय की संभावनाओं को और मजबूत करता दिख रहा है।

    इसके अलावा जिला जेल के लिए तिजारा क्षेत्र में भूमि चयन की प्रक्रिया शुरू होने से काले खां बाग स्थित करीब 14 बीघा भूमि पर बनी वर्तमान जेल की जगह खाली होने की संभावना है। इस भूमि पर मिनी सचिवालय बनाने की चर्चा भी स्थानीय स्तर पर हो रही है। वहीं तहसील कार्यालय के निकट स्थित प्रशासनिक ढांचे तथा किशनगढ़–अलवर हाईवे पर बंबोरा हनुमान मंदिर के सामने बने सद्भाव मंडप के डबल स्टोरी भवन का उपयोग नहीं होना भी संभावनाओं को बल देता है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि किशनगढ़ बास कभी प्रशासनिक और न्यायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है और लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में सेवाएं प्रदान करता था। समय के साथ इसके अधिकार क्षेत्र का विभाजन होने से इसकी पहचान कमजोर होती चली गई।

    राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में वर्ष 2018 में कांग्रेस के दीपचंद खेरिया के विधायक बनने और बसपा-निर्दलीय समर्थन से बनी सरकार के दौरान खैरथल को जिला घोषित किया गया। बाद में तिजारा को भी इसमें जोड़ा गया। वर्ष 2023 में खेरिया पुनः विधायक चुने गए, लेकिन प्रदेश में कांग्रेस सरकार नहीं बनने से उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है। वहीं लोकसभा चुनाव में भूपेंद्र यादव के केंद्रीय मंत्री बनने से क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया है।

    स्थानीय नागरिकों का मानना है कि अब जनप्रतिनिधियों को ऐतिहासिक महत्व वाले इस क्षेत्र की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए किशनगढ़ बास को पुनः प्रशासनिक और न्यायिक केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास करने चाहिए, जिससे इसे अपनी खोई हुई पहचान वापस मिल सके।

    मिशनसच न्यूज के लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप को जॉइन करें।
    https://chat.whatsapp.com/JX13MOGfl1tJUvBmQFDvB1

    अन्य खबरों के लिए देखें मिशनसच नेटवर्क

    https://missionsach.com/category/india

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here