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    पश्चिम बंगाल-असम चुनाव में सियासी घमासान, अलवर के भूपेंद्र–जितेंद्र की रणनीति पर देश की नजर 

    पश्चिम बंगाल-असम चुनाव – जीते तो देश में बल्ले बल्ले, हारे तो चुप्पी 

    प्रेम पाठक
    प्रेम पाठक
    प्रेम पाठक, संपादक,   मिशनसच न्यूज, अलवर। 

    अप्रैल के चुनाव में पश्चिम बंगाल में ममता की सरकार बनेगी या भाजपा अबकी बार बाजी मारेगी। वहीं असम के चुनाव में क्या होगा। यह तो परिणाम के बाद ही पता लगेगा पर ये चुनाव अलवर की राजनीति पर भी जबरदस्त असर डालने वाले है। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि पश्चिम बंगाल के भाजपा के चुनाव प्रभारी अलवर के सांसद भूपेंद्र यादव है व असम में कांग्रेस के प्रभारी अलवर के पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह है। परिणाम कुछ भी हो जीते तो जिले की सीमा से ही स्वागत की झड़ी लगेगी , हारे तो शायद किसी के बोलने की हिम्मत भी ना हो। 

    राष्ट्रीय राजनीति में अलवर जिले का महत्व पहले से ही रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेन्द्र सिंह अलवर से विधायक, सांसद एवं केन्द्र की यूपीए टू सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वहीं अब भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में भी अलवर का ओहदा बढ़ा है। अलवर के मौजूदा सांसद भूपेन्द्र यादव अभी एनडीए सरकार में केबिनेट मंत्री हैं। इन दोनों नेताओं के चलते कांग्रेस व भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में अलवर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

    चुनाव परिणाम तय करेंगे अलवर के दो क्षत्रपों का राजनीतिक भविष्य 

    आगामी अप्रेल महीने में हो रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम अलवर ​के दो क्षत्रपों का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे। इसमें कांग्रेस यदि असम में विधानसभा चुनाव जीतकर दस साल बाद सत्ता में वापसी करती है तो पार्टी के प्रदेश प्रभारी भंवर जितेन्द्र सिंह का कांग्रेस ही नहीं देश की राजनीति कद बढ़ना तय है और यदि वहां कांग्रेस की हार होती है तो पार्टी की राजनीति में जितेन्द्र सिंह की इमेज प्रभावित होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी तरह पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार बनाने में कामयाब रही तो इसका श्रेय वहां के चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव ​को मिलना तय है। बंगाल में चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में आने पर भूपेन्द्र यादव का राजनीतिक कद और बढ़ने की संभावना है। लेकिन बंगाल के चुनाव का परिणाम पार्टी के विपरीत रहा तो यादव का कद प्रभावित हो सकता है। दोनों प्रदेशों के विधानसभा चुनाव परिणाम का अलवर से जुड़े दो दिग्गजों की राजनीति पर सीधा असर पड़ने के कारण दोनों ही नेता अपने— अपने प्रदेशों में पार्टी की चुनावी तैयारी में जी जान से जुटे हैं।

    आलाकमान के नजदीक है अलवर के दोनों नेता 

    राष्टीय राजनीति में अलवर से जुूड़े दोनों नेता अपने— अपने राजनीतिक दल के आलाकमान के नजदीक माने जाते हैं। इनमें अलवर सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की टीम के प्रमुख सदस्य माने जाते है। यही कारण है कि उन्हें मंत्रिमंडल में अहम पद से लेकर संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जाती रही है। इसी प्रकार अलवर के पूर्व सांसद एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र सिंह भी सोनिया गांधी व राहुल गांधी की टीम के सदस्य माने जाते हैं। लंबे समय इन नेताओं से जितेंद्र सिंह की नजदीकी परिलक्षित भी होती रही है। अपने— अपने दलों में टॉप लीडरशिप से नजदीकी के कारण ही उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में अलग— अलग जिम्मेदारी मिलती रही है।

    चुनावी जिम्मेदारी के चलते अलवर से भी रहना पड़ रहा है  दूर

    अलवर सांसद व केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव पश्चिम बंगाल में चुनाव घोषणा के बाद वहीं चुनावी तैयारियों में व्यस्त हैं और सांगठनिक जिम्मेदारी निभाने के कारण अपने संसदीय क्षेत्र अलवर के दौरे भी नियमित नहीं रख पा रहे हैं। यही कारण कि यादव पिछले कई दिनों से अलवर जिले के दौरे पर नहीं आ पाए हैं और बंगाल में चुनावी कार्य में व्यस्त हैं। इसी तरह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव लंबे समय से असम में प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। असम में चुनावी कार्य की व्यस्तता के चलते सिंह पिछले कई दिनों अलवर भी नहीं आ पाए हैं।

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